संदेश

अक्टूबर, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

नौ करोड़ रुपये के आयुर्वेदिक अस्पताल से छूमंतर होगी बीमारियां

नौ करोड़ रुपये से निगोहा में अत्याधुनिक आयुष हास्पिटल का निर्माण शुरू - १०० बेड वाले हास्पिटल में मरीजों को पंचकर्म-आयुर्वेदिक पद्धति से होगा उपचार - चौबेपुर कसबे से १० किमी दूर निगोहा गांव जिला सर्वोत्तम आयुर्वेदिक चिकित्सालय - आयुष मंत्रालय ने वर्ष २०१६ में जारी किया था फरमान अब शुरू हुआ काम राहुल त्रिपाठी बिल्हौर। तहसील क्षेत्र के चौबेपुर निगोहा गांव में आयुष मंत्रालय भारत सरकार के द्वारा स्थित १०० बेड वाले जिले के सबसे अत्याधुनिक आयुष अस्पताल निर्माण का काम शुरू हो गया है। करीब नौ करोड़ रुपये की लागत से बन रहे आयुर्वेदिक अस्पताल निर्माण की घोषणा भारत सरकार की ओर से वर्ष २०१६ में की गई थी। इस अस्पताल के निर्माण से कानपुर नगर जनपद सहित कानपुर देहात के लाखों ग्रामीणों को सीधा लाभ होगा। चौबेपुर ब्लाक मुख्यालय से बेला रोड के समीप स्थित निगोहा गांव में राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत करीब नौ करोड़ रुपये की लागत से जिला के सबसे अत्याधुनिक और सबसे बड़े आयुष चिकित्सालय के निर्माण प्रक्रिया शुरू होने से क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी एसआर यादव ...

- वछना के पढऩे वाले युवाओं ने नील की खेती का किया विरोध

चित्र
स्वामी नारायण आश्रम में पढऩे वाले वीरों ने अंग्रेजों की नाक में किया दम - फिरंगियों ने कोठी में बंद कर वछना के सेनानियों को दी थी यातनाएं राहुल त्रिपाठी बिल्हौर। तहसील क्षेत्र के मकनपुर के अलावा अरौल, आंकिन, वछना, सैबसू, शिवराजपुर के वीर सपूतों का आजादी की लड़ाई में महती भूमिका रही है। अंग्रेज हुक्मरान क्षेत्र में नहरों से पानी के लिए गांव-गांव जाकर लगान वसूली के साथ-साथ जबरन नील की खेती कराते थे। इसके अलावा लगान और ईस्ट इंडिया कंपनी के उत्पाद न खरीदने पर विविध प्रकार की यातनाएं देते थे। लेकिन अंग्रेजी हुकूमत के विरोध में वछना गांव के स्वामी नारायण आश्रम में पढऩे वाले युवाओं ने अंगे्रजों की कोठी में जमकर आगजनी और पत्थरबाजी करते हुए विरोध के सुर तेज कर दिए थे। जिसके बाद ककवन, बिल्हौर, ककवन, देवहा, मकनपुर अरौल में अंगे्रजों विरोधी लहर से फिरंगी कड़ी सुरक्षा में ही क्षेत्र में आते थे। स्वतंत्रता संग्राम में महती भूमिका निभाने वाले वीर सपूतों के परिजन आज भी अंगे्रजों से लिए गए पूर्वजों विवाद को बताते नहीं थक रहे। वर्ष १९३० स्वामी नारायण आश्र...

- कानपुर से कन्नौज, फर्रुखाबाद जाते समय बिल्हौर में जरूर रुकते थे अटल जी

सैबसू के लोगों ने अटल जी को सुनने के लिए जाम कर दी थी जीटी रोड - कानपुर से कन्नौज, फर्रुखाबाद जाते समय बिल्हौर में जरूर रुकते थे अटल जी -  १९९८ में जीटी रोड पर अटल जी के लिए सैबसू के लोगों जाम की थी सड़क - कानपुर से फर्रुखाबाद जाने पर जगह-जगह होता था स्वागत - समर्थकों से आगृह पर वह गाड़ी के ऊपर ही खड़े होकर देते से भाषण राहुल त्रिपाठी बिल्हौर। पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की क्षेत्र में गहरी लोकप्रियता थी यही कारण है कि कन्नौज और फर्रुखाबाद जब भी वह जाते थे तब उनका चौबेपुर और बिल्हौर रुकना तय ही रहता था। अटल जी को देखने और सुनने के लिए क्षेत्रीय लोग इतने आतुर रहते थे कि उनके सुरक्षा कर्मियों से तू-तू मैं-मैं और जीटी रोड तक जाम करने की नौबत आ जाती थी। लेकिन अटल जी कभी भी ऐसे कार्यकर्ताओं को दुखी नहीं करते थे सभी को अनुशासन का पाठ पढ़ाकर उन्हें जरूर मार्ग दर्शन देते थे। वर्ष १९९८ में कानपुर से कन्नौज जा रहे पूर्व पीएम भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के जीटी रोड से गुजरने की सूचना पर सैबसू के भाजपा समर्थक चैंपियन शुक्ला, प्रकाश नाथ शुक्ल, सुशील अग्रिहोत्री आदि अपने कई समर्थकों क...