- कानपुर से कन्नौज, फर्रुखाबाद जाते समय बिल्हौर में जरूर रुकते थे अटल जी
सैबसू के लोगों ने अटल जी को सुनने के लिए जाम कर दी थी जीटी रोड
- कानपुर से कन्नौज, फर्रुखाबाद जाते समय बिल्हौर में जरूर रुकते थे अटल जी
- १९९८ में जीटी रोड पर अटल जी के लिए सैबसू के लोगों जाम की थी सड़क
- कानपुर से फर्रुखाबाद जाने पर जगह-जगह होता था स्वागत
- समर्थकों से आगृह पर वह गाड़ी के ऊपर ही खड़े होकर देते से भाषण
राहुल त्रिपाठी
बिल्हौर। पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की क्षेत्र में गहरी लोकप्रियता थी यही कारण है कि कन्नौज और फर्रुखाबाद जब भी वह जाते थे तब उनका चौबेपुर और बिल्हौर रुकना तय ही रहता था। अटल जी को देखने और सुनने के लिए क्षेत्रीय लोग इतने आतुर रहते थे कि उनके सुरक्षा कर्मियों से तू-तू मैं-मैं और जीटी रोड तक जाम करने की नौबत आ जाती थी। लेकिन अटल जी कभी भी ऐसे कार्यकर्ताओं को दुखी नहीं करते थे सभी को अनुशासन का पाठ पढ़ाकर उन्हें जरूर मार्ग दर्शन देते थे।
वर्ष १९९८ में कानपुर से कन्नौज जा रहे पूर्व पीएम भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के जीटी रोड से गुजरने की सूचना पर सैबसू के भाजपा समर्थक चैंपियन शुक्ला, प्रकाश नाथ शुक्ल, सुशील अग्रिहोत्री आदि अपने कई समर्थकों के साथ धौरसलार पहुंचे और जीटी रोड पर जाम लगाकर जबरदस्ती अटल जी की कारों की फ्लीट रोक दी। सुशील अग्रिहोत्री के मुताबिक अटल जी को देखने और सुनने के लिए ग्रामीणों में इतनी उत्सुकता थी की कई लोग पूर्व पीएम की फ्लीट को आते देखकर जीटी रोड पर बैठने और लेटने लगे। जीटी रोड पर अवरोध देख उतरे अटल जी के सुरक्षा कर्मियों ने जीटी रोड के ट्रैफिक को बाधित किए सभी को काबू किया। जब यह बात अटल जी को मालूम हुई तो उन्होंने सभी को अपनी कार के पास बुलाया। अटल जी के सामने पहुंचने पर सभी लोगों ने जब उनका पैर छूकर सम्मान किया तो वह पसीज गए और बोले किसी का रास्ता रोकना अच्छी बात नहीं........ है। जब सभी ग्रामीणों ने संबोधन करने की गुजारिश की तो अटल जी सभी को अपनी फ्लीट की गाडिय़ों में बिठाकर एसएन कालेज कन्नौज ले गए। वहीं बिल्हौर बार एसोसिएशन के वरिष्ठ अधिवक्ता पीसी कटियार ने बताया कि वर्ष १९७९ में जनसंघ क ा राष्ट्रीय अधिवेशन बृजेंद्र स्वरूप पार्क कानपुर में हुआ था तब उन्हें अटल जी का सानिध्य मिला था। वह विशाल हृदय वाले व्यक्ति थे बिना किसी भेदभाव के सभी से समान रूप से मिलते थे उनके साथ कई बार भोजन करने का भी मौका मिला।
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अटल जी के स्नेह में ही कूद पड़े चुनावी मैदान में
- अटल जी के व्यक्तिव से प्रभावित थे शिवदुलारे व जेलर श्याम दुलारे
बिल्हौर। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में चौबेपुर विधानसभा से वर्ष १९८० में चुनाव लडऩे वाले बिल्हौर के शिवदुलारे अवस्थी ने बताया कि अटल जी का पूरा जीवन जनसेवा और देशसेवा में गुजरा। वह इतने लोग प्रिय नेता थे कि उनके पास बात करने तक की छुट्टी नहीं रहती थी। इमरजेंसी में फर्रुखाबाद जिला जेल में जेलर रहे श्याम दुलारे अवस्थी ने बताया कि ब्रम्हदत्त द्विवेदी के संग उनको भी पूर्व पीएम भारतरत्न अटल जी से मिलने का मौका मिला। अटल जी से प्रेरित होकर ही उन्होंने पहले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संग, जनता पार्टी फिर जनसंघ और अब भाजपा की नीतियों परखा। अटल जी के स्नेह के चलते ही छोटे भाई श्याम दुलारे को चौबेपुर से १९८० में भाजपा के गठन फौरन बाद चुनावी मैदान में उतारा। हम सभी की लगन को देखते हुए अटल जी बैलाही बाजार में आयोजित जनसभा में आए और हमारा ही बल्कि क्षेत्रवासियों का उत्साह बढ़ाया। अटल जी के ओजस्वी भाषण को सुनने के लिए चौबेपुर की बैलाही बाजार में रात सात बजे तक लोग रुके रहे और उनके करीब २५ मिनट के भाषण सुना।
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इंसेट-१
बिल्हौर के पत्रकार भी मिले थे अटल जी से
बिल्हौर। वर्ष १९९४ में कई स्थानीय पत्रकार आशुतोष शुक्ला, अरविंद अग्रिहोत्री, अनुराग अवस्थी और स्व. छोटेलाल कुरील आदि भी पूर्व पीएम अटल बिहारी से सीधा संवादकर चुके हैं। अनुराग अवस्थी के अनुसार क्षेत्र के पत्रकारों ने कानपुर से फर्रुखाबाद जा रहे अटल जी के काफिले का जैसे-तैसे पीछाकर गांगपुर में भेंट की थी। इसके बाद अटल जी सभी क्षेत्रीय पत्रकारों को फर्रुखाबाद पीडब्लूडी गेस्ट हाउस ले गए थे और बिल्हौर विधानसभा सुरक्षित सीट को लेकर बारीकी से चर्चा की थी।
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अटल जी के भाषण को सुनने के लिए सात बजे तक डटे से लोग
- बैलाही बाजार में १९८० में विधानसभा चुनाव में आए थे अटल जी
- कानपुर से फर्रुखाबाद जाने पर जगह-जगह होता था स्वागत
- समर्थकों से आगृह पर वह गाड़ी के ऊपर ही खड़े होकर देते से भाषण
राहुल त्रिपाठी
बिल्हौर। पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने बिल्हौर विधानसभा सुरक्षित सीट पर भाजपा के गठन के बाद से अपना उम्मीदवार उतारना शुरू कर दिया था। यहीं कारण है कि अटलजी का बिल्हौर से गहरा नाता रहा है। अवस्थी मार्केट में कई जनसभाओं को याद करते हुए भाजपाइयों के अटल जी के स्मरण उनके निधन के बाद भी ताजा हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में चौबेपुर विधानसभा से वर्ष १९८० में चुनाव लडऩे वाले बिल्हौर के शिवदुलारे अवस्थी ने राजनैतिक जीवन को याद करते हुए बताते हैं कि अटल जी हमेशा देश की उन्नति के लिए ही चिंतित रहते थे और जनसेवा से जो कुछ भी वक्त मिलता था उसमें वह कविता पाठ और कविता रचना में लगाते थे। इमरजेंसी में फर्रुखाबाद जिला जेल में जेलर रहे श्याम दुलारे अवस्थी ने बताया कि ब्रम्हदत्त द्विवेदी के संग उनको भी पूर्व पीएम भारतरत्न अटल जी से मिलने का मौका मिला। उनसे प्रेरित होकर ही उन्होंने पहले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संग, जनता पार्टी फिर जनसंघ और अब भाजपा के कई पदों पर काम कर चुके हैं। वर्ष १९८० में छोटे भाई शिवदुलारे अवस्थी की चुनावीसभा से पूर्व उनके साथ काफी समय गुजारने का मौक ा मिला। फर्रु खाबाद से बिल्हौर तक की यात्रा के दौरान उन्होंने इंदिरा गांधी के इमजेंसी में पार्टी के पदाधिकारियों के विरोध पर जेल में डालने का गुस्सा स्पष्ट दिख रहा था। वह १९७० में कांग्रेस के द्वारा लगाई गई इमरजेंसी के विरोधी थे। सेवानिवृत्त जेलर के मुताबिक अटल जी की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके ओजस्वी भाषण को सुनने के लिए चौबेपुर की बैलाही बाजार में रात सात बजे तक रुके रहे और उनके करीब २५ मिनट के भाषण में हजारों की भीड़ मौजूद रही। अटल जी के करीब होने के कारण कई कांगे्रसियों ने नौकरी के दौरान उन्हें काफी परेशान भी किया, लेकिन अटल जी के कुशल नेतृत्व और सानिध्य ने कांग्रेसियों की अड़चनों को काफी बौना बना दिया।
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इंसेट-१
बिल्हौर के पत्रकार भी मिले थे अटल जी से
बिल्हौर। वर्ष १९९४ में कई स्थानीय पत्रकार आशुतोष शुक्ला, अरविंद अग्रिहोत्री, अनुराग अवस्थी और स्व. छोटेलाल कुरील आदि भी पूर्व पीएम अटल बिहारी से सीधा संवादकर चुके हैं। अनुराग अवस्थी के अनुसार क्षेत्र के पत्रकारों ने कानपुर से फर्रुखाबाद जा रहे अटल जी के काफिले का जैसे-तैसे पीछाकर गांगपुर में भेंट की थी। इसके बाद अटल जी सभी क्षेत्रीय पत्रकारों को फर्रुखाबाद पीडब्लूडी गेस्ट हाउस ले गए थे और बिल्हौर विधानसभा सुरक्षित सीट को लेकर बारीकी से चर्चा की थी।
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पट्टू पढ़ो तो पढ़ो वरना पिजड़ा खाली करो-अटल
- चौबेपुर में कांग्रेसियों को खुले मच से था ललकारा
- बिल्हौर में नसबंदी के विरुद्ध जमकर दिया था भाषण
- अवस्थी मार्केट में अटल जी तखत पर खड़े होकर जनता से करते थे संवाद
राहुल त्रिपाठी
बिल्हौर। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी जनता से सीधा संवाद करते थे, वह अपने संबोधन में विपक्षी दलों को ही नहीं बल्कि पार्टी में सामथ्र्य से काम न करने वालों को भी नहीं छोड़ते थे। वह अपने पार्टी पदाधिकारियों के संबोधन में अकसर यहीं कहते थे कि पट्टू पढ़ों तो पढ़ों वरना पिछड़ा छोड़ो, दूसरे पक्षी आएगा, पार्टी का जनाधार बढ़ाएगा।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई के साथ जनसंघ, जनता पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के कई अधिवेशनों में साथी रह चुके शिवदुलारे अवस्थी ने बताया कि १९८० में बैलाही बाजार चौबेपुर की चुनावी जनसभा में आने की सूचना पर आसपास क्षेत्र से ही नहीं बल्कि कई जिलों से उनके चाहने वाले भाषण सुनने के लिए आए थे। जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए उन्हें कई ऐसे कार्यकर्ताओं की पहचान भी की और उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया। बताया कि १९९९ में उनकी आंखों में बीमारी की सूचना पर पूर्व पीएम अटल बिहारी बाजपेई ने एम्स के वरिष्ठ अधिकारियों को बिल्हौर भेजा था, एम्स के अफसर उन्हें लेकर दिल्ली गए और उनकी आंखों की जांचकर रिपोर्ट विदेश जांच के लिए भेजी गई। इलाज के दौरान अटलजी से तो सीधी बात नहीं हुई लेकिन उनके द्वारा भेजे कई सांसद, आईएएस अफसर लगातार उनकी आवभगत में लगे रहे। भाजपा के जिलाध्यक्ष रहे रामशरण कटियार ने बतायाकि १९८५ के दशक में एकबार बिठूर में पार्टी पदाधिकारियों की बैठक के बाद अटल जी के साथ सभी लोग खाना खा रहे थे तभी कुछ कार्यकर्ताओं ने उनकी थाली में कई मिर्चा रख दिए, तब उन्होंने अपने शैली के अनुसार मिर्चा चाहिए नहीं, मिर्चा न खाओ-न खिलाओ बात कही थी। उन्होंने समर्थकों से कहा था जब मिर्च हटेगी, द्वेष मिटेगा, अंधेरा, उजाला फैलेगा देश बढ़ेगा। जिस पर सब समर्थक ठहाके मार कर हसे भी थे और उनके दूर-दृष्टि को बारीकी से समझे भी थे।
- कानपुर से कन्नौज, फर्रुखाबाद जाते समय बिल्हौर में जरूर रुकते थे अटल जी
- १९९८ में जीटी रोड पर अटल जी के लिए सैबसू के लोगों जाम की थी सड़क
- कानपुर से फर्रुखाबाद जाने पर जगह-जगह होता था स्वागत
- समर्थकों से आगृह पर वह गाड़ी के ऊपर ही खड़े होकर देते से भाषण
राहुल त्रिपाठी
बिल्हौर। पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की क्षेत्र में गहरी लोकप्रियता थी यही कारण है कि कन्नौज और फर्रुखाबाद जब भी वह जाते थे तब उनका चौबेपुर और बिल्हौर रुकना तय ही रहता था। अटल जी को देखने और सुनने के लिए क्षेत्रीय लोग इतने आतुर रहते थे कि उनके सुरक्षा कर्मियों से तू-तू मैं-मैं और जीटी रोड तक जाम करने की नौबत आ जाती थी। लेकिन अटल जी कभी भी ऐसे कार्यकर्ताओं को दुखी नहीं करते थे सभी को अनुशासन का पाठ पढ़ाकर उन्हें जरूर मार्ग दर्शन देते थे।
वर्ष १९९८ में कानपुर से कन्नौज जा रहे पूर्व पीएम भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के जीटी रोड से गुजरने की सूचना पर सैबसू के भाजपा समर्थक चैंपियन शुक्ला, प्रकाश नाथ शुक्ल, सुशील अग्रिहोत्री आदि अपने कई समर्थकों के साथ धौरसलार पहुंचे और जीटी रोड पर जाम लगाकर जबरदस्ती अटल जी की कारों की फ्लीट रोक दी। सुशील अग्रिहोत्री के मुताबिक अटल जी को देखने और सुनने के लिए ग्रामीणों में इतनी उत्सुकता थी की कई लोग पूर्व पीएम की फ्लीट को आते देखकर जीटी रोड पर बैठने और लेटने लगे। जीटी रोड पर अवरोध देख उतरे अटल जी के सुरक्षा कर्मियों ने जीटी रोड के ट्रैफिक को बाधित किए सभी को काबू किया। जब यह बात अटल जी को मालूम हुई तो उन्होंने सभी को अपनी कार के पास बुलाया। अटल जी के सामने पहुंचने पर सभी लोगों ने जब उनका पैर छूकर सम्मान किया तो वह पसीज गए और बोले किसी का रास्ता रोकना अच्छी बात नहीं........ है। जब सभी ग्रामीणों ने संबोधन करने की गुजारिश की तो अटल जी सभी को अपनी फ्लीट की गाडिय़ों में बिठाकर एसएन कालेज कन्नौज ले गए। वहीं बिल्हौर बार एसोसिएशन के वरिष्ठ अधिवक्ता पीसी कटियार ने बताया कि वर्ष १९७९ में जनसंघ क ा राष्ट्रीय अधिवेशन बृजेंद्र स्वरूप पार्क कानपुर में हुआ था तब उन्हें अटल जी का सानिध्य मिला था। वह विशाल हृदय वाले व्यक्ति थे बिना किसी भेदभाव के सभी से समान रूप से मिलते थे उनके साथ कई बार भोजन करने का भी मौका मिला।
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अटल जी के स्नेह में ही कूद पड़े चुनावी मैदान में
- अटल जी के व्यक्तिव से प्रभावित थे शिवदुलारे व जेलर श्याम दुलारे
बिल्हौर। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में चौबेपुर विधानसभा से वर्ष १९८० में चुनाव लडऩे वाले बिल्हौर के शिवदुलारे अवस्थी ने बताया कि अटल जी का पूरा जीवन जनसेवा और देशसेवा में गुजरा। वह इतने लोग प्रिय नेता थे कि उनके पास बात करने तक की छुट्टी नहीं रहती थी। इमरजेंसी में फर्रुखाबाद जिला जेल में जेलर रहे श्याम दुलारे अवस्थी ने बताया कि ब्रम्हदत्त द्विवेदी के संग उनको भी पूर्व पीएम भारतरत्न अटल जी से मिलने का मौका मिला। अटल जी से प्रेरित होकर ही उन्होंने पहले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संग, जनता पार्टी फिर जनसंघ और अब भाजपा की नीतियों परखा। अटल जी के स्नेह के चलते ही छोटे भाई श्याम दुलारे को चौबेपुर से १९८० में भाजपा के गठन फौरन बाद चुनावी मैदान में उतारा। हम सभी की लगन को देखते हुए अटल जी बैलाही बाजार में आयोजित जनसभा में आए और हमारा ही बल्कि क्षेत्रवासियों का उत्साह बढ़ाया। अटल जी के ओजस्वी भाषण को सुनने के लिए चौबेपुर की बैलाही बाजार में रात सात बजे तक लोग रुके रहे और उनके करीब २५ मिनट के भाषण सुना।
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इंसेट-१
बिल्हौर के पत्रकार भी मिले थे अटल जी से
बिल्हौर। वर्ष १९९४ में कई स्थानीय पत्रकार आशुतोष शुक्ला, अरविंद अग्रिहोत्री, अनुराग अवस्थी और स्व. छोटेलाल कुरील आदि भी पूर्व पीएम अटल बिहारी से सीधा संवादकर चुके हैं। अनुराग अवस्थी के अनुसार क्षेत्र के पत्रकारों ने कानपुर से फर्रुखाबाद जा रहे अटल जी के काफिले का जैसे-तैसे पीछाकर गांगपुर में भेंट की थी। इसके बाद अटल जी सभी क्षेत्रीय पत्रकारों को फर्रुखाबाद पीडब्लूडी गेस्ट हाउस ले गए थे और बिल्हौर विधानसभा सुरक्षित सीट को लेकर बारीकी से चर्चा की थी।
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अटल जी के भाषण को सुनने के लिए सात बजे तक डटे से लोग
- बैलाही बाजार में १९८० में विधानसभा चुनाव में आए थे अटल जी
- कानपुर से फर्रुखाबाद जाने पर जगह-जगह होता था स्वागत
- समर्थकों से आगृह पर वह गाड़ी के ऊपर ही खड़े होकर देते से भाषण
राहुल त्रिपाठी
बिल्हौर। पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने बिल्हौर विधानसभा सुरक्षित सीट पर भाजपा के गठन के बाद से अपना उम्मीदवार उतारना शुरू कर दिया था। यहीं कारण है कि अटलजी का बिल्हौर से गहरा नाता रहा है। अवस्थी मार्केट में कई जनसभाओं को याद करते हुए भाजपाइयों के अटल जी के स्मरण उनके निधन के बाद भी ताजा हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में चौबेपुर विधानसभा से वर्ष १९८० में चुनाव लडऩे वाले बिल्हौर के शिवदुलारे अवस्थी ने राजनैतिक जीवन को याद करते हुए बताते हैं कि अटल जी हमेशा देश की उन्नति के लिए ही चिंतित रहते थे और जनसेवा से जो कुछ भी वक्त मिलता था उसमें वह कविता पाठ और कविता रचना में लगाते थे। इमरजेंसी में फर्रुखाबाद जिला जेल में जेलर रहे श्याम दुलारे अवस्थी ने बताया कि ब्रम्हदत्त द्विवेदी के संग उनको भी पूर्व पीएम भारतरत्न अटल जी से मिलने का मौका मिला। उनसे प्रेरित होकर ही उन्होंने पहले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संग, जनता पार्टी फिर जनसंघ और अब भाजपा के कई पदों पर काम कर चुके हैं। वर्ष १९८० में छोटे भाई शिवदुलारे अवस्थी की चुनावीसभा से पूर्व उनके साथ काफी समय गुजारने का मौक ा मिला। फर्रु खाबाद से बिल्हौर तक की यात्रा के दौरान उन्होंने इंदिरा गांधी के इमजेंसी में पार्टी के पदाधिकारियों के विरोध पर जेल में डालने का गुस्सा स्पष्ट दिख रहा था। वह १९७० में कांग्रेस के द्वारा लगाई गई इमरजेंसी के विरोधी थे। सेवानिवृत्त जेलर के मुताबिक अटल जी की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके ओजस्वी भाषण को सुनने के लिए चौबेपुर की बैलाही बाजार में रात सात बजे तक रुके रहे और उनके करीब २५ मिनट के भाषण में हजारों की भीड़ मौजूद रही। अटल जी के करीब होने के कारण कई कांगे्रसियों ने नौकरी के दौरान उन्हें काफी परेशान भी किया, लेकिन अटल जी के कुशल नेतृत्व और सानिध्य ने कांग्रेसियों की अड़चनों को काफी बौना बना दिया।
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बिल्हौर के पत्रकार भी मिले थे अटल जी से
बिल्हौर। वर्ष १९९४ में कई स्थानीय पत्रकार आशुतोष शुक्ला, अरविंद अग्रिहोत्री, अनुराग अवस्थी और स्व. छोटेलाल कुरील आदि भी पूर्व पीएम अटल बिहारी से सीधा संवादकर चुके हैं। अनुराग अवस्थी के अनुसार क्षेत्र के पत्रकारों ने कानपुर से फर्रुखाबाद जा रहे अटल जी के काफिले का जैसे-तैसे पीछाकर गांगपुर में भेंट की थी। इसके बाद अटल जी सभी क्षेत्रीय पत्रकारों को फर्रुखाबाद पीडब्लूडी गेस्ट हाउस ले गए थे और बिल्हौर विधानसभा सुरक्षित सीट को लेकर बारीकी से चर्चा की थी।
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पट्टू पढ़ो तो पढ़ो वरना पिजड़ा खाली करो-अटल
- चौबेपुर में कांग्रेसियों को खुले मच से था ललकारा
- बिल्हौर में नसबंदी के विरुद्ध जमकर दिया था भाषण
- अवस्थी मार्केट में अटल जी तखत पर खड़े होकर जनता से करते थे संवाद
राहुल त्रिपाठी
बिल्हौर। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी जनता से सीधा संवाद करते थे, वह अपने संबोधन में विपक्षी दलों को ही नहीं बल्कि पार्टी में सामथ्र्य से काम न करने वालों को भी नहीं छोड़ते थे। वह अपने पार्टी पदाधिकारियों के संबोधन में अकसर यहीं कहते थे कि पट्टू पढ़ों तो पढ़ों वरना पिछड़ा छोड़ो, दूसरे पक्षी आएगा, पार्टी का जनाधार बढ़ाएगा।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई के साथ जनसंघ, जनता पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के कई अधिवेशनों में साथी रह चुके शिवदुलारे अवस्थी ने बताया कि १९८० में बैलाही बाजार चौबेपुर की चुनावी जनसभा में आने की सूचना पर आसपास क्षेत्र से ही नहीं बल्कि कई जिलों से उनके चाहने वाले भाषण सुनने के लिए आए थे। जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए उन्हें कई ऐसे कार्यकर्ताओं की पहचान भी की और उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया। बताया कि १९९९ में उनकी आंखों में बीमारी की सूचना पर पूर्व पीएम अटल बिहारी बाजपेई ने एम्स के वरिष्ठ अधिकारियों को बिल्हौर भेजा था, एम्स के अफसर उन्हें लेकर दिल्ली गए और उनकी आंखों की जांचकर रिपोर्ट विदेश जांच के लिए भेजी गई। इलाज के दौरान अटलजी से तो सीधी बात नहीं हुई लेकिन उनके द्वारा भेजे कई सांसद, आईएएस अफसर लगातार उनकी आवभगत में लगे रहे। भाजपा के जिलाध्यक्ष रहे रामशरण कटियार ने बतायाकि १९८५ के दशक में एकबार बिठूर में पार्टी पदाधिकारियों की बैठक के बाद अटल जी के साथ सभी लोग खाना खा रहे थे तभी कुछ कार्यकर्ताओं ने उनकी थाली में कई मिर्चा रख दिए, तब उन्होंने अपने शैली के अनुसार मिर्चा चाहिए नहीं, मिर्चा न खाओ-न खिलाओ बात कही थी। उन्होंने समर्थकों से कहा था जब मिर्च हटेगी, द्वेष मिटेगा, अंधेरा, उजाला फैलेगा देश बढ़ेगा। जिस पर सब समर्थक ठहाके मार कर हसे भी थे और उनके दूर-दृष्टि को बारीकी से समझे भी थे।
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