नए भाजपा कानपुर जिलाध्यक्ष आए, नए उम्मीदें - नई आशंकाएं लाए
राहुल त्रिपाठी
बीते कई माह तक भाजपा कानपुर ग्रामीण के लिए जिलाध्यक्ष के नाम को लेकर हुई माथा-पच्ची के बाद घाटमपुर सुरक्षित सीट से विधायक रह चुके उपेंद्र पासवान की जिम्मेदारी मिल चुकी है। पेशे से शिक्षक और क्षेत्रीय संगठन में जिम्मेदारी निभा चुके उपेंद्र पासवान ने 20 मार्च को कानपुर के नौबस्ता स्थित पार्टी कार्यालय से हवन-पूजन और पार्टी के कई पूर्व अध्यक्षों के सामने पद ग्रहण कर अपना भाषण देते हुए कई इच्छाए भी जाहिर कीं।हवन-पूजन के समय घाटमपुर से विधायक व मंत्री रह चुकी कमलरानी वरुण की बेटी कानपुर की जिला पंचायत अध्यक्ष, शिक्षिका स्वप्निल वरुण भी मंचासीन और खुश नजर आईं। वर्तमान में घाटमपुर सीट अपना दल के खाते में हैं और यहां सरोज कुरील विधायक हैं वह कार्यक्रम में मंच पर नहीं दिखी, जबकि बिल्हौर विधायक मोहित सोनकर, बिठूर विधायक अभिजीत सांगा जरूर नजर आए।उपेंद्र पासवान पहले ऐसे युवा पूर्व विधायक हैं जिनका संगठन में कोई प्रबल विरोध नहीं है, जबकि आवेदन करने वाले संगठन के 20 अन्य अध्यक्ष पद के दावेदारों के कई विरोधी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचन में लगे पदाधिकारियों के कान भरने में एड़ी चोटी का जोर लगाए थे।
भाजपा कानपुर ग्रामीण क्षेत्र बिल्हौर, बिठूर और घाटमपुर तक विस्तारित है, 20 मार्च को पार्टी कार्यालय में नव नियुक्त जिलाध्यक्ष की परिक्रमा, पावर दिखाने के साथ ही कई प्रकार के रुतबाई पैसा खर्चा करने वाले समर्थक भी दिखे, कुंतलों के फूल माला के ढेर दिखे और रंग-बिरंगे चश्मा, जूता, कुर्ता पैजामा सहित लग्जरी गाड़ियां लेकर आते जाते नेता से पदाधिकारी बनने की जुगत समर्थक भी मौजूद रहे।--------------------
कई मंडल अध्यक्षों पर लटक रही तलवार
जानकारी के अनुसार भाजपा कानपुर में वैसे तो 16 मंडल हैं, लेकिन जिलाध्क्ष चुनाव के कारण अभी तक 9 का ही चयन हो सका जबकि 16 में से 7 मंडल अध्यक्ष के पद रिक्त बताए हैं। वहीं कई मंडल अध्यक्ष के गैर दलों से संबंध होने, कम उम्र होने, पार्टी विरोधी होने की चर्चाओं के बीच हटने या फिर उनके ऊपर संयोजक की नियुक्ति किए जाने की बाते भी जोर शोर से चल रही हैं। वहीं एक पूर्व जिलाध्यक्ष के रहमोकरम से बने मंडल अध्यक्षों के गले भी सूखे दिख रहे हैं, कई पूर्व मंडल अध्यक्ष तवज्जों न मिलने से पहले ही पार्टी के अंदर विरोधी सुरों की हुंकार भरते रहे हैं जो अब और तेज होने की स्थित में हैं।---------------
दलिताें का पार्टी में दबदबा बढ़ा
सपा सहित बसपा भाजपा को सर्वणों की पार्टी बताते नहीं थकती, लेकिन भाजपा कानपुर ग्रामीण में वर्तमान में सर्वाधिक दबदबा दलितों का ही दिख रहा है। पिछड़ी जाति के समर्थक पदाधिकारी भी अब भाजपा कानपुर ग्रामीण में पदासीन नहीं हो पा रही है। सूत्रों की माने तो दलितों को साधने और बिल्हौर-घाटमपुर सहित मिश्रिख लोकसभा सीट सुरक्षित होने के कारण दलितों को पार्टी हाथोंहाथ ले रही है। बिल्हौर के परिदृश्य में 2022 में बसपा की मधु गौतम तीसरे, रचना गौतम दूसरे और मोहित सोनकर को सर्वाधिक एक लाख 25 हजार के करीब से अधिक वोट मिले थे, लेकिन लोकसभा चुनावों में उक्त वोट कम होने से भाजपा चिंतित है और दलितों को सम्मान देने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही। इससे पिछड़ों और सर्वणों में नाराजगी के स्वर भी अंदर ही अंदर अंकुरित हो रहे हैं।-----------
अध्यक्ष कहिन: पेशे से शिक्षक हूं झूठ नहीं बोल पाता
पहले अध्यक्षी भाषण में सबको साधने का प्रयास किया। विधायक का क्षेत्र निश्चित है, लेकिन अध्यक्ष पद का भार उससे ज्यादा है, उपेंद्र पासवान ने भाषण में माना कि भाजपा कानपुर ग्रामीण में विषम परिस्थितियां हैं। मंच से उन्होंने कार्यकर्ताओं के लिए भी विषम स्थित बताई। पुराने पदाधिकारियों से अनुभव लूंगा और भाजपा कानपुर ग्रामीण को आगे ले जाने की बात कही। दायित्व आते जाते रहते हैं इसलिए पार्टी बड़ी है इसके लिए हम सब काम करते रहे, आगे जिसको भी जो जिम्मेदारी मिले वह गंभीरता से उसे निभाए। विधानसभा व मंडल तक पहुंचने का प्रयास करुंगा। 10 से 2 बजे तक कार्यालय में बैठूंगा।



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