SAYED ZINDA SHAH MADAR MAKANPR BILAHUR KANPUR


मदार साहब ने मकनपुर से दुनिया को दिया मानवता का संदेश
 सालाना उर्स में पूरी दुनिया से बड़ी संख्या में उमड़ते ही मदार के मुरीद
  मकनपुर से पैदल ही मदार से ने सात बार की हज यात्रा
ईशन नदी में स्नान करते जायरीन
ईशन नदी में स्नान करते जायरीन

एतिहासिक मकनपुर कस्बे का मदार गेट
एतिहासिक मकनपुर कस्बे का मदार गेट

मेला के दौरान मकनपुर स्थित तहसील भवन
मेला के दौरान मकनपुर स्थित तहसील भवन

मदार साहब की वारगाह के सामने स्थित प्राचीन मस्जिद

सैयद बद्दीउद्दीन जिंदाशाह मदार की पवित्र दरगाह

मकनपुर मेला में बिक्री को आए नस्ली घोड़ा
 

 राहुल त्रिपाठी
बिल्हौर। देश दुनिया में मदार साहब के नाम से विख्यात सैयद बद्दीउद्दीन जिंदाशाह मदार की पैदाइश २४२ हिजरी में सरिया देश के हलब शहर में हुआ है। दुनिया में मानवता का संदेश देने के लिए मदार साहब पैदल ही हिंदोस्तान पहुंचे और अपने जीवन में सात बार मकनपुर से ही हज कर एशिया के कई देशों में भ्रमण कर अपना संदेश दिया।
फेयर कमेटी इंटरकालेज के प्रधानाचार्य और वर्षों से सैयद बद्दीउद्दीन जिंदाशाह मदार पर शोध कर रहे मुक्तिदा हुसैन जाफरी ने बताया कि सीरिया में २४२ हिजरी में पैदाइश होने के बाद मदार साहब ४० वर्ष की आयु में पैदल ही मकनपुर पहुंचे और यहीं के होकर रहे गए। मदार साहब ने हिंदोस्तान के गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पंजाब, विध्यांचल, सतहुणा की पहाडिय़ों सहित पाकिस्तान के सिंध प्रांत में रुक कर लोगों को पीक-फकीर बने रहकर मानवता का संदेश दिया। मदार साहब मकनपुर से ही ७ बार खुशकी यानि पैदल ही पाकिस्तान, अफगानिस्तान से होते हुए साऊदी अरब में हज के लिए पहुंचे और रास्ते में पडऩे पर गांवों, कस्बों, शहरों के लोगों को कौमी एकता और मनवता का संदेश दिया। शोध के मुताबिक मदार साहब ने ५९६ साल की उम्र में अंतिम सांस मकनपुर में ही २८२ हिजरी यानि १४१४ ईस्वी में ली। मदार साहब के गुजर जाने के बाद अवध के तत्कालीन बादशाह इब्राहिम शाह सरकी ने उनकी दरगाह बनवाई, इसके बाद औरंगजेब ने दरगाह में संगमरमर की जालियां और समीप ही एक मस्जिद का निर्माण कराया। १४१४ ईस्वी से पहले मकनपुर को खैराबाद के नाम से जाना जाता था, लेकिन मक्क न सरबाज मदारी ने जब मदार साहब के दरगाह पर सोने का कलश लगवाया जब से खैराबाद का नाम उन्हें के नाम से मकनपुर पड़ गया। तब से आज तक साल में तीन दिवसीय उर्स में लाखों की संख्या में जायरीन दरगाह में चादरपोशी और इबादत के लिए पहुंचते हैं। इसके अलावा मकनपुर में ही उत्तर भारत का सबसे बड़ा घोड़ों का मेला भी सजता है।

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