राहुल त्रिपाठी बिल्हौर अमर उजाला
कैसे हों किसान खुशहाल, जब कृषि है कार्यालय खस्ताहाल
उप संभागीय कार्यालय दुर्दशा के कारण हुआ जर्जर
लाखों की लैब में नहीं हो रही मिट्टी उर्वरता की जांच
कार्यालय में अधिकारी-कर्मी की तैनात तक नहीं
बिल्हौर। तहसील क्षेत्र में गिरती खेतों की उर्वरता को देखने हुए शासन स्तर से उप संभागीय कृषि प्रसार कार्यालय में अत्याधुनिक प्रयोगशाला की स्थापना कराई गई है, लेकिन विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के कारण लाखों रुपये से तैयार लैब का कोई लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है। वहीं करीब नब्बे हजार किसानों को योजनाएं पहुंचाने वाला तहसील स्तरीय कार्यालय पूरी तरह दुर्दशा का शिकार है। स्टाफ की कमी के कारण यहां आने वाले किसानों बिना किसी जानकारी के बैरंग ही लौट रहे हैं।
प्रकृतिक मार से परेशान किसानों को सहूलियत देने के लिए सरकार की ओर से तहसील मुख्यालय में उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी की तैनाती और कार्यालय स्थापना कराई गई है। इसी कार्यालय से चौबेपुर, शिवराजपुर, ककवन और बिल्हौर विकास खंड के कृषि क्षेत्र की उर्वरता, कृषि सयंत्र प्रबंधन, बीजे वितरण, कीट नाशक वितरण सहित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना, खाद वितरण, केसीसी आदि योजनाओं को संचालित किया जाता है। लेकिन जिला कृषि अधिकारी की अनदेखी के कारण कार्यालय परिसर बुरी तरह दुर्दशा का शिकार है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार भवन अनदेखी के कारण दिनों-दिन जर्जर होता जा रहा है। शाम ढलते ही अराजक तत्व भी परिसर में सक्रिय हो जाते हैं। वहीं वर्षों से उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी का पद रिक्त होने के कारण विभाग के विषय वस्तु विशेषज्ञ ही कार्यालय को संचालित करने में लगे हुए हैं। इससे विभाग की कई योजनाओं की जानकारी किसानों तक नहीं पहुंच पा रही है। किसानों के खेतों की उर्वरता बढ़ाने के लिए कार्यालय में लाखों रुपये खर्च का प्रयोगशाला का निर्माण भी वर्षों पहले सरकार की ओर से कराया गया था, लेकिन अनदेखी के कारण और प्रयोगशाला सहायक की नियुक्ति न होने से प्रयोगशाला उपकरण धूल खा रहे हैं। कार्यालय में तैनात प्रभारी विषय वस्तु विशेषज्ञ रामपाल ने बताया कि लैब में सिर्फ नाइट्रोजन, फासफोरस और पोटाश जांच के लिए ही सयंत्र लगे हैं, लेकिन कोई लैब सहायक की तैनाती न होने के लंबे समय से किसी भी किसान को मृदा स्वास्थ्य परीक्षण की लाभ नहीं मिला है। किसान कानपुर स्थित मुख्यालय में जाकर इसका लाभ ले सकते हैं। कार्यालय से सिर्फ बीजों का वितरण ही मुख्य रूप से किया जाता है। शेष सभी कार्य कानपुर कार्यालय से ही संचालित होते हैं।
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जिम्मेदार बोले
विभाग में कर्मियों-अधिकारियों की कमी है, जिसके लिए शासन स्तर पर कई पर पहल भी की जा चुकी है, बिल्हौर में किसानों की सुविधा केलिए सभी योजनाएं संचालित हैं, जहां तक कार्यालय भवन की दुर्दशा की बात है तो वल्र्ड बैंक से कई बार मद के लिए फरियाद लगाई गई, लेकिन अभी तक धन नहीं मिला है जैसे ही धन आवंटित होता है कार्यालय का रंगरोगन करा दिया जाएगा।
वीके सिंह, उप निदेशक कृषि प्रसार, कानपुर नगर
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तहसील के किसानों संग सरकार लगातार छल कर रही है, ओलावृष्टि का मुआवजा हो या फिर कृषि विभाग की योजनाएं इनका कोई लाभ क्षेत्रीय किसानों को नहीं मिल पा रहा है। उप संभागीय कार्यालय में अधिकारियों की तैनाती न होने से क्षेत्र के किसान पारंपरिक खेती करने को मजबूर हैं। जल्द ही किसान कलेक्ट्रेट में पंचायत कर उप संभागीय कार्यालय के लिए अपनी आवाज बुलंद करेंगे।
विकास तिवारी, भाकियू, कानपुर मंडल अध्यक्ष
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बिन कंप्यूटर विभाग कैसे हो हाईटेक
बिल्हौर। कृषि विभाग ने सभी योजनाओं में पारदर्शिता लाने के लिए आनलाइन पंजीयन, बिक्री और अनुदान की व्यवस्था की है, लेकिन तहसील स्तरीय उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी कार्यालय में आज तक कंप्यूटर ही नहीं है। कार्यालय में कंप्यूटर न होने के कारण आने वाले किसानों को इंटरनेट कैफे जाकर पंजीयन कराकर धन खर्चा करना पड़ता है। मजे की बात यह है कि विद्युत विभाग ने कार्यालय में १० किलोवाट का कनेक्शन दे रखा है, लेकिन दुर्दशा के कारण कार्यालय परिसर में एक बल्ब तक नहीं जलता।
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अभी तक खातें में नहीं पहुंचा अनुदान
बिल्हौर। कृषि विभाग के द्वारा गेंहू बीज के वितरण के दौरान सभी किसानों के आनलाइन पंजीयन कराए थे और सभी से सीबीएस बैंक खाते का नंबर लेकर अनुदान का पैसा खाते में आने की बात कही थी, लेकिन करीब छह माह गुजर जाने के बाद भी अभी तक अधिकांश किसानों के बैंकों में अनुदान की राशि नहीं आई है। इससे रोजाना बड़ी संख्या में किसान कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। उधर कृषि अधिकारियों का कहना है कि अनुदान का पैसा दो सप्ताह के अंदर ही किसानों के खाते में पहुंच जाएगा।
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खूब हुए प्रयास, पर नहीं बुझ सकी तालाबों की प्यास
- कब्जे के क ारण बरसात में भी दर्जनों आदर्श तालाब रहेंगे प्यासे
- तहसील मुख्यालय के ठीक पीछे ही सूखे पड़े हैं तालाब
- दर्जनों तालाबों में पानी पहुंचाने वाली नालियों पर कब्जे
राहुल त्रिपाठी
बिल्हौर। राजस्व और विकास अधिकारियों के काफी प्रयास के बाद भी तहसील क्षेत्र के दर्जनों गांवों के सैकड़ों तालाबों की प्यास नहीं बुझ सकी है, वहीं चारागाह के नाम से आवंटित जमीन के आसपास पानी और सिचाई की व्यवस्था न होने से पशुओं और पशुपालकों को सर्वाधिक दिक्कत हो रही हैं जबकि तहसील क्षेत्र के कई ऐसे तालाब हैं जिनको जल बचाओ योजना के अंर्तगत लाखों की लागत से ख्ुादवा तो दिया गया, लेकिन पानी कहां से आएगा इसकी कोई कार्ययोजना तक नहीं बनाई गई। इससे बारिश में भी तालाबों के भरने की कोई संभावना नहीं है।
शासन के फरमान को जिले के राजस्व और विकास अधिकारियों ने कितना ध्यान दिया इसका स्पष्ट उदाहरण तहसील मुख्यालय के ठीक पीछे स्थित कई बीघा में फैले बचकड़ा ताल तालाब, बरौली के जूनियर स्कूल का तालाब, औरंवताहरपुर का तालाब, अरौल जीटी रोड का तालाब, घिमउ का तालाब आदि हैं, जहां मनरेगा योजना के द्वारा लाखों रुपये खर्च कर कई बर आदर्श तालाब की खुदाई कराई गई, लेकिन पानी एक बूंद नहीं पहुंचा। नतीजा यह हुआ कि जल के अभाव में तालाबों के जलीय जीव समाप्त हो गए और तालाब तक पानी लाने वाली नालियां खेतों में बदल गईं। घिमउ ग्राम सभा के प्रधान गणेश बाजपेई की मानें तो गांव से करीब ३ किमी दूर रजबहा है जहां से गांव के जैसे-तैसे तीन तालाब तो भर गए लेकिन शेष कई तालाब आज तक कभी भरे ही नहीं जा सके हैं। खलिहान में मौजूद एक तालाब को अधिकारियों ने काफी मन से खुदवाया, लेकिन इसके बाद भी नालियों पर कब्जा होने के कारण वहां तक पानी नहीं पहुंच सका। सैबसू प्रधान पति विमलेश मिश्रा ने बताया कि गांव का पक्का तालाब सहित सभी तालाब वर्षों से सूखें हैं प्रयास में कोई कोर कसर नहीं रखी, लेकिन पानी नहीं पहुंचा है, ग्रामीण परेशान हैं। बिल्हौर देहात ग्राम प्रधान सारिका कटियार के पति शेखर कटियार ने बताया कि कब्जा हुए तालाबों को खाली कराने के लिए एसडीएम साहब से अपील की जा चुकी है। बचकड़ा ताल को भराने के लिए प्रयास किए गए, लेकिन कोर्ट में मामला विचाराधीन होने के कारण राजस्व अधिकारी भी सक्रियता के साथ काम कराने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री जल बचाओ योजना के अंर्तगत ६५, शिवराजपुर में ४०, ककवन में २४ और चौबेपुर में ३६ तालाबों को चयनित किया गया था, लेकिन कुल १६५ तालाबों में ककवन विकास खंड में बहुतायत में पानी भराया गया शेष सभी विकास खंडों में रजबहों की कनेक्टविटी टूटने के कारण आधे से कम ही तालाबों में पानी भराने का इंतजाम हो सका। जिन तालाबों में पानी नहीं भरा है उनमें बरसात में पानी भरने की संभावना कम ही है क्षेत्रीय लोगों की माने तो तालाबों को जाने वाली सभी नालियां पूरी तरह कब्जा कर ली गई हैं इसलिए बारिश के पानी से तालाब लबालब नहीं होंगे।
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जिम्मेदार बोले
तहसील क्षेत्र के चारों विकास खंडों में बड़ी तादाद में तालाबों को भराया गया है सिर्फ वहीं तालाब सूखे हैं जहां तक रजबहे,नहरों और नालियों से पानी पहुंचाना संभव नहीं है। जहां कहीं भी तालाबों की नालियों पर कब्जे हैं उसकी जानकारी तत्काल क्षेत्रीय ग्राम प्रधान लिखित रूप में दे, क्षेत्रीय राजस्व निरीक्षक, लेखपाल को मौके पर भेजकर कार्यवाई करवाई जाएगी।
आलोक कुमार, उप जिलाधिकारी, बिल्हौर
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इंसेट-१
पानी की कमी में जलीय जीव हुए खत्म
बिल्हौर। कब्जा और अतिक्रमण से तबाह हुए तालाबों से जलीय जीव मेढ़क, जोंक, सीपी, केंचुआ सहित कई किसान मित्र कीट, कछुआ आदि पानी के अभाव में समाप्त हो चुके हैं। बिल्हौर में विविध प्रकार के मेढ़कों की प्रजातियों के लिए जाने वाले बचकड़ा ताल नाम के तालाब में बीते कई वर्षों से पानी की एक बूंद नहीं पहुंची है इसलिए आसपास के लोगों को तालाब का व्यापारिक रूप में इस्तेमाल शुरू कर दिया है। राजस्व विभाग की ढिलाई के कई निर्माण भी तालाब में हो चुके हैं। यह हाल सिर्फ एक तालाब का नहीं है बल्कि तहसील क्षेत्र के सभी तालाबों का है रिहायसी इलाकों के प्राकृतिक तालाब में रसायनिक तत्व जाने के कारण जलीय पारितंत्र पूरी तरह समाप्त हो चुका है।
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इंसेट-२
चारागाह में चरने के लिए नहीं बची हरियाली
बिल्हौर। तहसील क्षेत्र में करीब दो सैकड़ा अधिक चारागाह हैं जिनके द्वारा पशुओं को हरा चारा मिलना चाहिए, लेकिन राजस्व अधिकारियों की अनदेखी, विकास विभाग की ढिलाई के कारण शायद ही ऐसा कोई चारागाह हो जहां हरियाली हो या फिर घास। पानी की कमी के कारण बड़ी संख्या में चारागाह ऊसर में तब्दील हो चुके हैं। वहीं क्षेत्रीय वन अधिकारी एके श्रीवास्तव ने बताया कि राजस्व विभाग कार्ययोजना बनाकर दे तो पूरी सक्रियता के साथ चारागाह में काम किया जाएगा। ग्राम प्रधान भी चारागाह में पशुओं के आहार उत्पादन के लिए संपर्क कर सकते हैं।
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उत्तरीपुरा नवीन मंडी स्थल किसानों के लिए सफेद हाथी
या
करोड़ों रुपए की अनाज नवीन मंडी, लापरवाही से पड़ी ठंडी
क्रासर
- आढ़तियों क ो आवंटन के बाद भी नहीं खुल रहीं दुकानें
- मंडी में किसानों के अनाज की नहीं हो रही खरीद
- अनदेखी से लाखों के इलेक्ट्रानिक कांटे खा रहे जंग
- मंडी के आसपास निजी आढ़ते काट रहीं चांदी
राहुल त्रिपाठी
बिल्हौर। तहसील क्षेत्र के किसानों को अनाज का सही दाम और मंडी की योजनाओं का लाभ मिले सके इसलिए करोड़ों रुपए खर्चकर उत्तरीपुरा में नवीन मंडी दो दशक पहले स्थापित की गई, लेकिन सरकार के द्वारा साल-दर-साल रुपए खर्च करने के बाद भी अभी तक नवीन मंडी किसानों को कोई लाभ नहीं मिल सका। अधिकारियों की अनदेखी और मिलीभगत से कसबे में कई निजी आढ़ती सरकार की योजना को पलीता लगा रहे हैं।
क्षेत्र के हजारों किसानों को गेहूं, धान, मक्का, दलहन आदि का सही दाम मिले इसके लिए उत्तरीपुरा में नवीन मंडी स्थल की स्थापना का लाभ दशकों बाद भी लोगों को नहीं मिल रहा है। मंडी आंकड़ों के मुताबिक स्थल की ३५ दुकानों के पंजीकृत आढ़तियों, मंडी सचिव की मिलीभगत के कारण वर्षों बाद भी अपनी दुकानें नहीं खोल रहे, जबकि उक्त सभी लेवी शुल्क (मंडी शुल्क) की चोरी मंडी के आसपास निजी आढ़तें खोलकर कर रहे हैं। मंडी स्थल को अत्याधुनिक बनाने के लिए वर्ष २०१३ में प्रदेश के मुख्यमंत्री ने मंडी स्थल पर इलेक्ट्रानिक ब्रिज स्थापित करने के लिए के धन आवंटित किया है, प्रदेश सरकार के द्वारा क्षेत्रीय किसानों के लाभ के लिए निरंतर मंडी स्थल पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी मंडी समिति की स्थापना के करीब २० बरस बाद किसानों से एक दाने की खरीद तक नहीं हुई है। मंडी स्थल अनदेखी का शिकार है। मंडी परिसर में तैनात सुरक्षाकर्मियों की लंबी फौज है, लेकिन मंडी स्थल में कई क्षेत्रीय लोगों ने अपने दुधारू पशु बांध रखे हैं इसके साथ ही आलाअफसरों के द्वारा निरीक्षण न करने पर मंडी कार्यालय में तैनात अधिकारियों कर्मी मनमुताबिक ढंग से आते जाते हैं। मंडी में अनाज खरीद न होने के कारण करोड़ों रुपए के इलेक्ट्रानिक कांटे जंग खा रहे हैं जबकि आधा सैकड़ों से अधिक दुकानें रखरखाव के अभाव में जर्जर होती जा रही हैं।
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जिम्मेदार बोले-
उत्तरीपुरा नवीन मंडी स्थल में अनाज खरीद की जानकारी है, मैं स्वयं मंडी सचिव से इसबारे में बात कर बताता हूं, मंडी स्थल को कई अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए काम चल रहा है। अनाज खरीद क्यों नहीं हो रही क्या कारण हैं इसकी जानकारी करता हूं, जल्द ही खरीद चालू कराई जाएगी।
डा. अमित यादव, उप निदेशक मंडी, कानपुर मंडल
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मंडी चालू है, पंजीकृत आढ़तियों को नोटिस दिया गया है यदि समय से मंडी की दुकानें नहीं खुलतीं तो उन्हेंं निरस्त करा जाएगा। किसान अपना अनाज मंडी में बिक्री कर सकते हैं यदि मंडी में दुकानें नहीं खुलती तो इसकी लिखित शिकायत पहले मंडी सचिव को दें इसके बाद मुझे बताएं तत्काल कार्रवाई होगी।
आलोक कुमार, मंडी अध्यक्ष व एसडीएम बिल्हौर
मंडी निदेशक की अनेदखी और जिला प्रशासन की लापरवाही के कारण उत्तरीपुरा मंडी से किसानों को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। मंडी सचिव और निजी आढ़तियों में सांठगांठ होने के कारण सरकार को प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए की राजस्व हानि हो रही है। जल्द ही मंडल के किसान लखनऊ जाकर इसका विरोध करेंगे।
विकास तिवारी, मंडल महासचिव, भारतीय किसान यूनियन
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क्षेत्रीय किसान दैवीय आपदा और सूखे से परेशान हैं, लेकिन इसके बाद नवीन मंडी में किसानों की अनदेखी चरम पर है। पंजीकृत आढ़ती जानबूझकर मंडी के अंदर आवंटित दुकानें नहीं खोल रहे जबकि वहीं आढ़ती मंडी के बाहर खरीद कर रहें है। मंडी स्थल के गड़बड़झाले में अधिकारी, कर्मी और निजी आढ़ती किसानों को लूटने पर लगे हुए हैं।
महेश मिश्रा, जिलाध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन
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ककवन में पांडु नदी ही ग्रामीणों की शौच का ठिकाना
- विकास खंड क्षेत्र में शौचालय निर्माण सिर्फ आंकड़ों में
- ब्लाक की ७० फीसद आबादी खुले में जाती शौच
ककवन(बिल्हौर)। जिला प्रशासन जहां गंगा नदी के इर्द-गिर्द स्थित गांवों में करोड़ों रुपए खर्च का हजारों शौचालय बनवा रही है वहीं जिले के ककवन ब्लाक की ७० फीसद आबादी खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। ब्लाक से गुजरी पांडु नदी और निचली गंग नहर ग्रामीणों के शौच का मुख्य ठिकाना है जबकि इसी नदी के आसपास कानपुर देहात जिले के दर्जनों गांवों के ग्रामीण भी शौच के लिए जाते हैं।
ककवन विकास खंड से गुजरी पांडु नदी को साफ स्वच्छ बनाने के लिए जिला प्रशासन के शायद कोई कार्य योजना नहीं है यही कारण है कि कृषि प्रधान ग्रामीणों वाले ब्लाक की २५ ग्राम सभाओं की ७० फीसद आबादी आज भी निचली गंग नहर और पांडु नदी के आसपास शौच जाकर स्वच्छ भारत अभियान की पोल-पट्टी खोल रही है। पूरे ककवन ब्लाक की सभी ग्राम सभाएं पांडु नदी और निचली गंग नहर के आसपास ही हैं इसलिए ग्रामीण शौचालयों के अभाव में सुबह-शाम इन्हीं के आसपास शौच जाते हैं। कसिगवां ग्राम सभा के भारत सिंह, जगत सिंह और ग्राम प्रधान छेदीलाल ने बताया कि गांव के सभी ग्रामीण खेती किसानी करते हैं, डीएम,एसपी को शायद ही कभी गांव आए हो, यहीं कारण है कि उनके गांवों में सरकारी योजनाएं कागजों पर ही संचालित हैं शौचालय निर्माण सिर्फ कोरम पूर्ण करने के लिए शायद ही हुआ हो, आज भी लोग नदी के आसपास ही शौच को जाते हैं। बताया कि यदि कभी कोई ग्रामीण शौचालय बनवाना भी चाहता तो उसे ग्राम विकास अधिकारी खोजे नहीं मिलते विकास खंड कार्यालय में उसकी फरियाद भी नहीं सुनी जाती। उधर ककवन के प्रभारी बीडीओ सच्चिदानंद प्रसाद ने बताया कि लोहिया गांवों में वरीयता के आधार पर शौचालय बनवाए जाते हैंइसके साथ ही अन्य गांवों के ग्रामीणों के लिए प्रतिवर्ष लक्ष्य आते हैं जो भी ग्रामीण शौचालय निर्माण के इच्छुक है वह लिखित रूप में कार्यालय में आवेदन दे उन्हें लाभांवित किया जाएगा।
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इंसेट-
१५ मई से प्रधान करेंगे जुर्माना
बिल्हौर। खंड विकास अधिकारी सच्चिदानंद प्रसाद ने बताया कि ग्राम प्रधान पंचायत राज अधिनियम की धारा ८ के तहत १५ मई २०१६ से खुले में शौच करते पाए जाने पर ग्रामीणों से ५०० रुपए जुर्माना वसूलेंगे। अभी सभी ग्रामीणों को शौचालय निर्माण के लिए जागरुक किया जा रहा है।
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खुले में शौच जाने वाले ग्रामीणों के लिए बच्चे लगाएंगे जयकारे
- कानपुर जिलाधिकारी ने किया खुला एलान
- बच्चे खुले में शौच जाने वालों का बनाएंगे पोस्टर
- रोक पर भी खुले शौच पर नहीं मिलेगा योजनाओं का लाभ
राहुल त्रिपाठी
बिल्हौर। जनपद के सभी गांवों में खुले में शौच जाने वाले ग्रामीणों के लिए स्कूली बच्चे उनकी जय-जयकार करेंगे। इसके साथ-साथ स्कूली बच्चे खुले में शौच कर रहे व्यक्ति को फूल भेंटकर उनका स्क्रेच व पोस्टर तैयारकर गांव भर में चस्पा कर उन्हें जागरुक करेंगे। यह एलान कानपुर नगर के जिलाधिकारी ने जैसरमऊ सरैया गांव में ग्रामीणों व अधिकारियों से चौपाल लगाकर कही। इसके साथ ही स्वच्छ भारत अभियान के तहत घर में शौचालय बनवा लेने के बाद भी उसका प्रयोग न करने वाले लोगों की सूची तैयारकर उनसे शौचालय निर्माण की लागत का ब्याज सहित वसूली के आदेश भी विकास खंड अधिकारियों को दिए। जिलेभर की ग्रामसभाओं के वीडीओ को निर्देशित कर कहा कि प्रत्येक गांव में खुले में शौच जाने वाले लोगों पर नजर रखने के लिए महिलाओं-पुरुषों की निगरानी समिति का गठन करें।
जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने पूरे जनपद के स्कूली बच्चों, युवाओं व विकास खंड से संबंधित अधिकारियों से गांवों में स्वच्छता लाने के लिए खुले में शौच जाने वाले ग्रामीणों देखते ही उनके जयकारे लगाने की अपील की है। उन्होंने जैसरमऊ गांव में चौपाल में आए सभी प्रमुख अधिकारियों व ग्रामीणों से कहा कि यदि रोक के बाद भी खुले में कोई शौच जा रहा है तो उसके लिए उसे शौच के दौरान ही फूल भेंट करें। डीएम यहीं नहीं रुके उन्होंने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में तैनात शिक्षक-शिक्षिकाओं से बच्चों द्वारा खुले में शौच जाने वाले ग्रामीणों का स्क्रेच, पोस्टर बनवाकर उन्हें गांव में जगह-जगह चस्पा करने को भी कहा । उन्होंने कहां कि सिर्फ सरकारी पैसे से शौचालय निर्माण से गांवों में स्वच्छता नहीं आएगी बल्कि शौचालय के नियमित इस्तेमाल से ही कई प्रकार की बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है। ग्राम प्रधान, वीडीओ गांव में दस-दस महिला-पुरुषों की निगरानी समिति का गठन करें जो रोज सुबह-शाम खेतों में शौच जाने वाले लोगों पर नजर रखें, निगरानी समिति के सदस्य ऐसे लोगों की सूची तैयार करें और बीडीओ को दें। जिसके बाद खुले में शौच जाने वाले ग्रामीणों की प्रत्येक तरह की सरकारी सुविधा रोकी जा सकें। गंगा कटरी गांवों के ग्रामीणों की गंगा सफाई में ज्यादा जिम्मेदारी है, इसलिए वह अधिक से अधिक जीवनदायिनी गंगा मैया को स्वच्छ बनाने में सहयोग करें। वैसे भी आने वाले दस सालों में यदि घर में शौचालय नहीं होगा तो लड़कों की शादी हो असंभव हो जाएगा। जबकि खुले में शौच जाने से दूषित स्थान से कई किमी मीटर क्षेत्र में कई तरह की घातक संक्रामक बीमारियां फैलती हैं। जिलाधिकारी ने शिक्षा और विकास विभाग के अधिकारियों से उक्त कार्रवाई की रिपोर्ट भी कलेक्ट्रेट में देने के आदेश दिए। जिलाधिकारी के द्वारा जारी फरमान की चर्चा सभी मुख्य अधिकारी, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण् करते रहे। अब देखना दिलचस्प होगा कि स्कूल के शिक्षक और विकास विभाग के अधिकारी स्वच्छता जागरुकता में कितना सक्रिय होते हैं।
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ब्रिटिश हुकूमत के नहर पुलों की मियाद हुई फुल
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१५० साल पुराने निचली गंग नहर पुल दे गए जबाब
- भारी वाहन कभी तोड़ सकते बिल्हौर का कानपुर देहात से संपर्क
- लखनऊ-आगरा ग्रीन एक्सप्रेस वे डंपर व ट्रकों से तबाह हुए पुल
- सिचाई विभाग की ढिलाई से पीडब्लूडी नहीं कर पा रहा मरम्मत
- बिल्हौर के तीन में से दो नहर पुल बंद, ककवन पुल पर लोड बढ़ा
राहुल त्रिपाठी
बिल्हौर। तहसील क्षेत्र को कानपुर देहात, औरैया, इटावा, कन्नौज जिलों से जोडऩे वाले निचली गंग नहर के सभी पुल कई दशक पहले ही मियाद खो चुके हैं। नहर पर बने तहसील के तीन पुलों पर सर्वाधिक वाहनों का आवागमन हैं, इनमें आइमा, भौसाना नहर पुल को पीडब्लूडी ने पहले ही बंदकर दिया है जबकि शेष सभी पर भारी वाहनों के गुजरने पर दुर्घटना की आशंका भी पीडब्लूडी के अधिकारियों ने जताई है। आइमा और शिवराजपुर के मध्य अब सिर्फ ककवन के पुल पर ही वाहनों का आवागमन सर्वाधिक है मियाद पूरी होने और हाइवे निर्माण में लगे डंपर, ओवर लोड वाहनों के गुजरने से यह पुल कभी भी क्षतिग्रस्त हो सकता है।
बिट्रिश हुकूमत में अंगे्रज शासकों ने क्षेत्र की सिचाई के लिए निचली गंग नहर का निर्माण कराया था। इस नहर से कई जिलों, विकास खंडों में बड़ी संख्या में खेतों की सिचाई होती है। कानपुर महानगर की कई औद्योगिक इकाइयों और पनकी पावर हाउस प्लांट की पानी की सप्लाई भी इसी नहर से की जाती है जबकि उत्तरीपुरा में लग रहे १,३२० मेगावाट क्षमता के विद्युत संयत्र को भी इसी नहर से जल की आपूर्ति की जाएगी। कन्नौज जनपद के भी एक बड़े भूभाग को इसी नहर से सिचाई का पानी मिलता है, लेकिन इसके बाद भी इस नहर की खस्ताहाल पटरी, आवागमन के जर्जर पुलों, सिचाई विभाग की चौकियां, झालें, कोठियां सहित कई संपतियां अनदेखी और दुर्दशा का शिकार हैं। इसी नहर से सरकार को भारी राजस्व की प्राप्ती भी होती है। सिचाई विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण ककवन, खरपतपुर झाल के भवन धराशाई हो चुके हैं। विभागीय संपतियों को नशेड़ी और अन्य आराजक तत्व चट कर गए हैं। उधर बिल्हौर और कानपुर देहात से जोडऩे के लिए नहर पर वर्ष १८५० के करीब आवागमन के लिए पुल अब अपनी मियाद खो चुके हैं। होली के दिन ही भौसाना नहर पुल पर एक ट्रक पुल से नहर में जा गिरा था, इसी तरह आइमा पुल को पीडब्लूडी ने पूरी तरह बंदकर दिया है। लोक निर्माण विभाग ने सभी पुलों से पलड़ा झाड़ लिया है। मियाद खो चुके नहर पर बने सभी पुल क्षतिग्रस्त होने से आसपास गांवों के हजारों लोगों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। क्षेत्र के दो प्रमुख पुलों आइमा व भौसाना के बंद होने से इनका पूरा ट्रैफिक अब ककवन नहर पुल पर आ गया है। इस कारण ककवन पुल पर कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है और बिल्हौर-रसूलाबाद मार्ग पर आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाएगा। अभी बिल्हौर मकनपुर बाया रसूलाबाद, शिवराजपुर-शिवली मार्ग पर आवागमन पूरी तरह बंध है। ककवन थाना पुलिस ने वाहनों को रोकने के लिए आइमा पुल पर बैरीकेटिंग कर सिपाहियों की ड्यूटी लगाई है। अब देखना दिलचस्प होगा कि जिला प्रशासन हादसा रोकने के लिए पहले कदम उठाता है या फिर बाद में।
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जिम्मेदार बोले-
निचली गंग नहर पर बने सभी मुख्य पुलों की जांच, मरम्मत, रखरखाव और नए पुलों के निर्माण की कार्ययोजना तैयारकर कलेक्ट्रेट के माध्यम से लोक निर्माण विभाग को भेजी गई है, लेकिन पीडब्लूडी और सिचाई विभाग में सामंजस्य न होने के कारण अभी भौसाना और आइमा पुल पर विधिवत कार्य शुरू नहीं हो सका है। लोगों की समस्या को देखते हुए जल्द ही जिलाधिकारी से संपर्क कर समस्या से अवगत करा दिया जाएगा।
आलोक कुमार, उप जिलाधिकारी, बिल्हौर
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तहसील क्षेत्र के सभी नहर पुल सौ से डेढ सौ वर्ष पुराने हैं, सभी की मियाद पूरी हो चुकी है। कई बार सिचाई विभाग से संपर्क कर मरम्मत और नए पुलों के निर्माण के लिए पत्र व्यवहार किया गया, लेकिन इसके बाद भी अभी तक कोई जबाब नहीं दिया गया है। विभाग के विशेषज्ञ जब पुलों के निरीक्षण के लिए जाते हैं तो पानी के कारण भली प्रकार जांच नहीं कर पाते।
प्रकाश सिंह, एई, पीडब्लूडी, बिल्हौर सर्किल
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निचली गंग नहर के इन गांवों में बने हैं पुल
आइमा, उठ्ठा, मनावा, ककवन, मद्दूपुल, मुस्ता पुल, भौसाना, आंटी, प्रतापपुर, कुरसौली पुल
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इंसेट-१
हमारे नहीं सिचाई विभाग के हैं पुल
बिल्हौर। लोक निर्माण विभाग के एई ने बताया कि निचली गंग नहर पर बने सभी पुल सिचाई विभाग के हैं, पुरानी तकनीक से बने पुल पत्थरों के माध्यम से बनाए गए हैं, कई पुलों पर निर्माण वर्ष १८५० दर्ज है। जिन पुलों पर वाहनों की क्षमता कम है वह तो पैदल निकलने लायक है, लेकिन मियाद पूरी हो जाने के कारण कुछ भी कभी भी घटित हो सकता है। इसके साथ ही आइमा, ककवन, भौसाना, प्रतापपुर नहर पुल पर तय क्षमता से करीब ५० से ६० गुना अधिक लोड वाहन गुजर रहे हैं। सिचाई विभाग यदि सहयोग करे तो सभी प्रमुख पुलों का स्टीमेट तैयार कर शासन को भेजा जाए और वरीयता के आधार पर निर्माण कार्य शुरू कराया जाए।
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पुल टूटने से इन गांवों के ग्रामीणों हैं परेशान
ककवन में आइमा पुल टूटने से प्रभावित गांव
रहीमपुर विषधन, शाहपुर दूलू, मैदों, खरपतपुर, दलेलपुर, सुर्शी, सिघौली, मदारपुर, जलालपुर, मकनपुर, इलियासपुर, मुनौव्वरपुर, मौजमपुर, सिंघपुर, कुरेह आदि
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शिवराजपुर में भौसाना पुल टूटने से प्रभावित गांव
गौरी अभयपुर, भौसाना, मरहमत नगर, रुद्रपुर, सिकंदरपुर, दीदरपुर, देवकली, भटपुरा, दहेलिया, बिकरू, बोझा आदि
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अमर उजाला विशेष:-
शैक्षणिक विकास की आस में ककवन की बेटियां
- दसवीं के बाद ककवन की लड़कियां छोड़ रही पढ़ाई
- ब्लाक के २५ गांवों में कोई इंटर काजेल तक नहीं
- बुनियादी समस्याओं से निजी शिक्षण संस्थानों ने मुंहफेरा
- चुनावी वायदों पर खरे नहीं उतर रहीं महिला जनप्रतिनिधि
राहुल त्रिपाठी
ककवन (बिल्हौर)। क्षेत्र की जनता ने ग्रामसभा से लेकर लोकसभा तक विभिन्न ओहदों के लिए महिलाओं को चुनकर सदन में भेजा है, लेकिन इसके बाद भी विकास खंड क्षेत्र में बड़ी संख्या में इंटर कालेज, महाविद्यालय सहित अन्य प्रकार की शैक्षणिक संस्थाएं न होने से छात्राओं और युवतियां पढाई छोडऩे को मजबूर हैं। सभी पार्टियों के नेता, विधायक, सांसद, मंत्री बनने के बाद भी चुनाव में किए गए वायदों को आजतक पूरा नहीं कर सके हैं।
जनपद के प्रमुख विकास खंडों में एक ककवन दशकों बाद भी बेहतर शैक्षणिक वातावरण की आस लगाए है, यहां अभी तक कोई उच्च शिक्षण संस्थानों स्थापिन नहीं हो सका है। सरकारी स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था कागजों पर ही परवान चढ़ रही हैं जबकि ब्लाक का एक मात्र मान्यता प्राप्त डीपीएसएन कालेज १० वीं तक ही छात्र-छात्राओं को शिक्षा दे पा रहा है। ब्लाक में कोई राजकीय इंटर कालेज, महाविद्यालय, आईटीआई, कौशल विकास केंद्र आज तक नहीं खुल सका है। बिजली, सड़क और पेयजल की समस्या के कारण निजी क्षेत्र के शिक्षण संस्थान भी ककवन की ओर दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। लोकतंत्र के लिहाज से क्षेत्र की जनता ग्राम प्रधान, ब्लाक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य, विधायक और सांसद के रूप में महिलाओं को पदासीन किया, लेकिन इसके बाद भी चुनी हुई महिलाओं ने क्षेत्रीय किशोरियों, युवतियों के लिए किसी भी प्रकार से शैक्षिक विकास की कोई योजना तैयार नहीं की। ककवन में रहने वालीं पूर्व बीडीसी ममता अग्हिोत्री, डा. संतोष यादव, निशा यादव सहित कई क्षेत्रीय लोगों की मानें तो विभिन्न पदों पर चुनी गईं महिलाएं अपने निर्वाचन क्षेत्र में नहीं रहतीं इसकारण उनके पास ककवन की बुनियादी समस्याओं की जानकारी ही नहीं हैं। बतायाकि ग्राम प्रधान प्रीती सोनी बिल्हौर में, ब्लाक प्रमुख निर्मला दिवाकर बांगरमऊ उन्नाव में, जिला पंचायत सदस्य नीतू लखनऊ में, क्षेत्रीय विधायक अरुणा कोरी कानपुर में और सांसद मलावां और दिल्ली में रहकर ही क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। ऐसे में क्षेत्रीय जनता को उक्त सभी जनप्रतिनिधियों से किसी भी प्रकार के शैक्षिक विकास की उम्मीदें धीरे-धीरे कम होती जा रही हैं। वहीं दसवीं के बाद पढाई छोडऩे वाली छात्रा सुनैना ने बताया कि ककवन के डीपीएसएन इंटर कालेज में १२ वीं वित्त विहीन कक्षाएं संचालित होती हैं, लेकिन अधिक फीस होने और सीमित विषय होने के कारण परिवारीजनों ने उनकी पढ़ाई बंद करा दी। इसी तरह पारुल, प्रियंका और विनीता ने बताया कि सांइस साइड का कोई कालेज उनके यहां न होने से उनके जैसी कई लड़कियां जिनके हाईस्कूल में अच्छे अंक आए हैं उन सभी ने पढाई ही छोड़ दी हैं। ११ वीं का दाखिला बिल्हौर में होता है या फिर रसूलाबाद कानपुर देहात में रोज आने जाने की समस्या है इसके चलते परिवारीजनों ने उन्हें आगे बढ़ाने से ही मना कर दिया है। सरकार जब तक उनके लिय स्कूल बनवाएगी तब तक काफी समय गुजर जाएगा।
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ककवन की जनता ने इन महिलाओं को चुना
ग्राम प्रधान-प्रीती सोनी
ब्लाक प्रमुख- निर्मला दिवाकर
जिला पंचायत सदस्य- नीतू अवस्थी
विधायक- अरुणा कोरी
सांसद- अंजू बाला
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खुले में शौच करते पाए जाने पर ५०० रुपए जुर्माना
- डीपीआरओ ने निर्मल गंगा अभियान के तहत जारी कि निर्देश
- तहसील बिल्हौर के गंगा कटरी गांवों के प्रधान करेंगे जुर्माना
- गंगा कटरी गांवों में ५,००० शौचालयों को निर्माण जारी
राहुल त्रिपाठी
बिल्हौर। राष्ट्रीय नदी गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए शासन से आए फरमान के बाद जिला के आलाअफसर सक्रिय हो गए हैं। जिला पंचायत राज अधिकारी ने जनपद के गंगा कटरी वाले पांच विकास खंडों में खुले में शौच करते पाए जाने पर ५०० रु. का जुर्माना और दोबारा गलती करने पर एक हजार रु. का जुर्माना करने और सरकारी योजनाओं का लाभ न देने के आदेश पारित किए हैं। जिला प्रशासन उक्त सभी ब्लाकों में पांच हजार से अधिक शौचालय के निर्माण में दिन-रात एक किए हुए हैं।
सरकार की योजना के अनुसार यदि अधिकारियों की कथनी-करनी एक-सी रही तो जल्द ही धार्मिक नदी गंगा पावन हो जाएगी। जिला प्रशासन की ओर से इसी शुरुआत बिल्हौर, शिवराजपुर, चौबपुर, कल्याणपुर, सरसौल के गंगा कटरी गांवों की ओर से शुरू हो गई है। जिला पंचायत राजधिकारी हरिशंकर सिंह ने बताया कि जिले के सभी पांच गंगा कटरी वाले विकास खंडों में १५ मई २०१६ तक पांच हजार शौचालय बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उक्त सभी शौचाल निर्धारित समय बनकर तैयार हो जाएंगे। इसलिए ग्राम विकास अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए बिना शौचालयों वाले परिवारों को तत्काल लाभाविंत और प्रेरित करने के आदेश दिए गए हैं। इसके बाद १५ मई से ही पंचायती राज अधिनियम की धारा आठ के तहत गंगा कटरी क्षेत्र के ग्राम प्रधान खुले में शौच करने वालों पर ५०० रुपए का जुर्माना लगाएंगे। जुर्माना न देने की दशा में ग्राम प्रधान अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए स्थानीय थाना पुलिस की सहायता भी ले सकेंगे। उन्होंने बताया कि किसी भी दशा में गंगा कटरी क्षेत्र के ग्रामीण अपने ग्राम प्रधान, ग्राम विकास अधिकारी या फिर खंड विकास अधिकारी से संपर्क कर निशुल्क शौचालय निर्माण करवा सकते हैं। उक्त गांवों के ग्रामीण शौचालय में ही जाएं इसके लिए भी कई तरह के जागरुकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। बताया कि जिले में गंगा नदी के समीप करीब चार सैकड़ा छोटे बड़े गांव हैं जिनमें हजारों की संख्या में ग्रामीण शौच के लिए गंगा कटरी के खुले मैदानों में जाते हैं,राष्ट्रीय नदी घोषित होने के कारण पूरे देश में स्वच्छ निर्मल गंगा का अभियान के तहत ऐसे गांवों में वरीयता के साथ शौचालय बनवाए जा रहे हैं।
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बिल्हौर ब्लाक के गंगा कटरी गांव
आंकिन, अरौल, गिलवट अमीनावाद, हासिमपुर, बहरामपुर, संजती बादशाहपुर, ददिखा, नानामऊ, हसौली काजीगंज, सभियापुर, बोहनार, नानामऊ, महिगवां, गौरी, मोहद्दीनपुर, अकबरपुर सेंग, गदनपुर आहार, मतलबपुर जुलाहा, राधन, सिहुरामऊ
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मोटी पगार वाले सफाईकर्मियों की बल्ले-बल्ले
बिल्हौर। तहसील क्षेत्र के चार विकास खंडों में कुल २३६ सफाईकर्मियों की नियुक्ति प्रदेश सरकार के द्वारा साफ-सफाई के लिए की गई है, लेकिन बिल्हौर ब्लाक के ८८, ककवन के ३२, चौबेपुर के १२८ और शिवराजपुर के ९० सफाईकर्मी प्रतिमाह करीबन २० हजार रुपये पगार लेकर भी नियमित काम के लिए अपने कार्यक्षेत्र नहीं पहुंच रहे हैं।
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मदार साहब का मकनपुर बनेगा माडल कसबा
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एतिहासिक कसबा मकनपुर में पड़ेगी अंडरग्राउड बिजली लाइन
क्रासर
- शासन ने अधिकारियों से तलब क ी रिपोर्ट
- एतिहासिक मकनपुर को माडल कसबा बनाने की प्रक्रिया
- विद्युत फाल्ट व बिजली चोरी पर लगाम लगाने की कवायद
राहुल त्रिपाठी
बिल्हौर। आने वाले दिनों में मदार नगरी के नाम से देश-दुनिया में ख्याति पाने वाले मकनपुर कसबे में मकड़ी की जाले की तरह लटकने वाले बिजली के तार पूरी तरह से अंडरग्राउंड कर दिए जाएंगे। शासन से आए फरमान के बाद विद्युत विभाग के अफसर लगातार मकनपुर में अंडरग्राउंड बिजली लाइन बिछाने की कार्ययोजना पर स्टीमेट तैयार कर रहे हैं। अफसरों जून माह में काम शुरू की संभावना जता रहे हैं।
बदउद्दीन जिंदाशाह मदार का नगर मकनपुर अब जर्जर और झूल रहे बिजली के तारों से पूरी तरह मुक्त होगा। सरकार ने विद्युत अधिकारियों को एतिहासिक कसबा मकनपुर के लिए अंडरग्राउंड बिजली लाइन डालने का फरमान जारी किया है। बिल्हौर विद्युत उपकेंद्र के एसडीओ हरिबरन सिंह ने बतायाकि शासन स्तर से मकनपुर में अंडर ग्राउड बिजली लाइन डालने के लिए कई दौर का सर्वे का किया जा चुका है। लखनऊ-आगरा ग्रीन एक्सप्रेस वे के निकट पहले ही अंडरग्राउड बिजली तार डाले जा चुके हैं। विद्युत विभाग मकनपुर के सभी हाईटेंशन बिजली लाइनों को अंडरग्राउंड करने के बाद अब कसबे के अंडर भी सभी प्रकार की सप्लाई करने वाली बिजली लाइनों को भी टेलीफोन की केबिलों की तरह भूमिगत करेगा। भूमिगत बिजली लाइनों के पडऩे से एक ओर जहां विद्युत फाल्ट पूरी तरह समाप्त हो जाएंगे वहीं दूसरी और बिजली चोरी पर भी पूरी तरह लगाम लग जाएगी। वहीं मकनपुर मेला और सालाना उर्स में खंभों से गुजरे विद्युत तारों से जायरीनों पर मडराने वाला खतरा भी पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। विभाग की ओर से अंडर ग्राउंड बिजली लाइन डालने का स्टीमेट सरकार को प्रेषित कर दिया गया है। वहीं अधिशाषी अभियंता सतीश मिश्रा ने बताया कि माडल कसबा बनाने के लिए मकनपुर में पहले ही ३३ केवीए का सब स्टेशन स्थापित किया जा चुका है अंडरग्राउड बिजली लाइन पड़ जाने से उपभोक्ताओं और मदार साहब की दर पर आने वाले जायरीनों को काफी सहूलियत होगी। वहीं सूत्रों की मानें तो अंडरग्राउंड बिजली लाइन डालने की योजना मकनपुर सफल होती है तो बिल्हौर, चौबेपुर, शिवराजपुर, अरौल, ककवन में भी अंडरग्राउंड बिजली लाइन डाली जाएगी।
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इंसेट-१
बिल्हौर में बिछेगा पीवीसी बायर
बिल्हौर। कसबे के सभी मोहल्लों में जर्जर तारों की जगह पीवीसी वायर पडऩे का रास्ता साफ हो गया है। विद्युत विभाग को नगर में करीब २० किमी क्षेत्र में केबिल बिछाने की लिए पीवीसी केबिल प्राप्त हो गया है। सहयोगी उपकरण मिलते ही एक सप्ताह में काम शुरू करा दिया जाएगा। इसके बाद दी जाने वाली बिजली की यूनिट का मीटर से मिलान किया जाएगा। इससे यह पता चल सकेगा कि जो आपूर्ति दी जा रही है उसके आधार पर उपभोक्ताओं को बिजली मिल रही है या नहीं। इसी तरह उपकेंद्र पर प्रत्येक फीडर के हिसाब से लगाए जाने वाले मीटर भी बताएंगे कि जो आपूर्ति उनके मीटर में दशायी गई है वो उपभोक्ताओं तक पहुंची या बिजली चोरी हुई।
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इंसेट-२
लो वोल्टेज की समस्या होगी दूर
बिल्हौर। विद्युत सब स्टेशन के जेई सुमित कुमार ने बताया कि बिल्हौर नगर की विद्युत सप्लाई में सुधार लाने के लिए करीब ५० लाख रुपये की लागत एक नया फीडर स्थापित किया जाएगा। इससे बिल्हौर और चौबिगही गांव को भिन्न-भिन्न फीडरों से बिजली आपूर्ति दी जाएगी। इसी तरह बलराम नगर और बिल्हौर नगर के लिए विभाग को करीब २५ लाख रुपये की लागत वाला ५ एमबीए का नया ट्रांसफार्मर प्राप्त हो गया है। इस ट्रांसफार्मर के लग जाने से कसबे में लो वोल्टेज, विद्युत कट और ओवर लोडिंग से फाल्ट की समस्या पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
अमर उजाला विशेष
राजस्व परिषद का फरमान बिल्हौर के भूगोल में होगा बदलाव
- कानपुर देहात के कई राजस्व गांव बिल्हौर में जोड़े जाएंगे
- रसूलाबाद के ३० राजस्व गांवों के रिपोर्ट राजस्व परिषद की तलब
- १९९६-९७ में कानपुर नगर के ककवन ब्लाक से काटे गए थे गांव
राहुल त्रिपाठी
बिल्हौर। तहसील क्षेत्र के कन्नौज जनपद में जुडऩे की अटकलों के मध्य पड़ोसी जनपद कानपुर देहात की रसूलाबाद तहसील के ३० राजस्व गांवों के बिल्हौर तहसील में जुडऩे की कवायद राजस्व परिषद की ओर से जारी हो गई है। बिल्हौर तहसील से वर्ष १९९६ में पृथक किए गए गांव फिर से कानपुर नगर जिले में जुड़ेगें। इसकी पुष्टी कानपुर देहात रसूलाबाद एसडीएम ने की है।
राजस्व परिषद से आए फरमान के बाद कानपुर नगर और कानपुर देहात जनपदों के भूगोल में परिवर्तन की कार्रवाई फिर से शुरू हो गई है। सूत्रों की मानें तो राजस्व परिषद ने कानपुर देहात के रसूलाबाद तहसील में वर्ष १९९६-९७ वित्तीय वर्ष में ककवन विकास खंड के ३० गांव जोड़े गए थे। तब से ककवन ब्लाक के उक्त ग्रामीण सर्किल रेट और अन्य सुविधाओं को लेकर कानपुर नगर में जुडऩे की मांग कर रहे थे। इसी को ध्यान में रखते हुए राजस्व परिषद ने एसडीएम रसूलाबाद से उक्त ३० गांवों के राजस्व अभिलेख तलब किए हैं। कानपुर देहात, कानपुर नगर का काफी राजस्व क्षेत्र कन्नौज जिले में जुडऩे की अटकले भी अधिकारियों ने अंदर ही अंदर जाहिर की हैं। तहसीलदार बिल्हौर ब्यास नारायण उमराव ने बताया कि जिला मुख्यालय से अभी तहसील क्षेत्र में नए गांवों के जुडऩे की आधिकारिक सूचना तो नहीं है, लेकिन कानपुर विकास प्राधिकरण के विस्तार होने की संभावना को देखते हुए हो सकता है कि रसूलाबाद तहसील के कुछ गांव बिल्हौर में जोड़े जाएं।
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जिम्मेदार बोले
बिल्हौर तहसील में कानपुर देहात रसूलाबाद के ३० राजस्व गांवों के जुडऩे की सूचना तो है लेकिन आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। कई बार रसूलाबाद एसडीएम से जानकारी की कोशिश की गई लेकिन संपर्क नहीं हो सका है। कन्नौज में तहसील का कु छ हिस्सा जुडऩे की चर्चाएं जरूर हैं, लेकिन अभी किसी भी तरह की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।
आलोक कुमार, उप जिलाधिकारी, बिल्हौर, कानपुर नगर
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रसूलाबाद तहसील मुख्यालय के ककवन ब्लाक से संबद्ध रहे करीब ३० गांवों की जानकारी तलब की है। सूचना है कि उक्त गांवों को पूर्व की तरह कानपुर नगर के ककवन ब्लाक में जोड़ा जाएगा। तहसील प्रशासन ने सभी गांवों की सूची तैयार कर जिलाधिकारी कार्यालय को प्रेषित कर दी है।
विनीता सिंह, एसडीएम, रसूलाबाद, कानपुर देहात
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ककवन के लोगों की पुरानी लड़ाई पर ही राजस्व परिषद अमल कर रहा है। ब्लाक के कई लोगों की रिश्तेदारी तो जिलों में बंट गई है। दोबारा से ३० गांवों के कानपुर नगर में मिल जाने से लोगों में आपार खुशी है। उक्त गांवों के जुडऩे से क्षेत्रीय बाजार गुलजार होगे जिसका लाभ सभी ग्रामीणों को मिलेगा।
अखिलेश अवस्थी, जिला पंचायत पति ककवन, जिला कानपुर नगर
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ककवन ब्लाक का पुराना स्वरूप लौटने से क्षेत्रीय ग्रामीणों को सीधा लाभ होगा। दशकों पहले स्थलीय सर्वे किए बगैर और बिना ग्रामीणों की राय से ही गांवों को कानपुर देहात में जोड़ दिया गया था।
जगदेव सिंह यादव, श्रम संविदा बोर्ड चेयरमैन
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ये राजस्व गांव बिल्हौर तहसील में जुडेंगे-
बर्रा-ठर्रा, बरिगौं, औरंगपुर गहदेवा, खेड़ा कुर्सी, भीतरगांव, खान हमीरपुर, उरिया खडग़पुर, शहबाजपुर, तिस्ती, बिरहुन, सुनामी, रसूलपुर, अंता, गुलैंदा, नौहां-नौगांव, घाघू, उरगना, रिउरी, पलिया बांसखेड़ा, सौंघ, रामपुर तालुका, नूराज, रामपुर नरुआ, रामकृष्ण निवादा आदि
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इंसेट-१
गांवों की राजस्व भूमि के सर्किल रेट में होगा इजाफा
बिल्हौर। कानपुर नगर में जुडऩे से रसूलाबाद तहसील के सभी तीस गांवों की जमीनों का सर्किल रेट में बढ़ोत्तरी होगी। साथ ही पुराने अभिलेखों में आज भी कई राजस्व अभिलेखों में बिल्हौर तहसील दर्ज होने के कारण वादकारियों को दोनों तहसील के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इसी तरह उक्त सभी गांवों की कनेक्टविटी जिला मुख्यालय से हो जाएगी। अभी कानपुर देहात कलेक्ट्रेट पहुंचने में उक्त गांवों के लोगों को ३ से चार घंटा लगता है।
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इंसेट-२
ककवनवासियों में खुशी
ककवन। विकास खंड का हिस्सा रहे सभी गांवों के फिर से बिल्हौर तहसील में जुडऩे को लेकर ग्रामीणों में खुशी की लहर है। रमेश अवस्थी, सुभाष यादव,बलवीर सिंह, बीडीसी कुलदीप सिंह, सूर्यभान सिंह ने बताया कि सरकार ककवन के पुराने स्वरूप लौटाने के लिए अच्छा काम कर रही है। पुराने क्षेत्र के फिर से ककवन में मिल जाने से जहां कानपुर नगर जिले की राजस्व आय बढ़ेगी वहीं ग्रामीणों को विविध योजनाओं का लाभ भी सहजता से मिल सकेगा।
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इंसेट-३
क्षेत्रीय भूगोल बदलने पर लगी सरकार
बिल्हौर। सूत्रों की माने तो कन्नौज के विस्तार के लिए लगातार प्रदेश सरकार काम कर रही। कानपुर नगर को नून नदी तक सीमित कर बिल्हौर की राजस्व क्षेत्र की स्थित जस की तस रखने के लिए अंदर ही अंदर कार्रवाई जारी है। राजस्व अधिकारियों की माने तो आने वाले समय में बिठूर कानपुर नगर और सिकंदरा कानपुर देहात में तहसील या फिर ब्लाक मुख्यालय की योजना पर अंदर ही अंदर कवायद चल रही है।
हेडिंग
पंाच साल में एक करोड़ रुपए से विकास कार्य करा सकेंगे प्रधान
या
विकास के लिए ग्रामसभाओं को एक करोड़ रुपए की सौगात
- १४ वें व राजवित्त आयोग, मनरेगा, बीएचएसजी ने खोला खजाना
- एडीओ पंचायत और ग्राम प्रधानों के दिए गए अधिकारी
- प्रत्येक ग्राम पंचायत को टेन नंगर बनवाना हुआ अनिवार्य
राहुल त्रिपाठी
बिल्हौर। गांव में विकास के लिए अब धन की दिक्कत आड़े नहीं आएगी। १४ वें राजवित्त में शासन की ओर से एडीओ पंचायत और ग्राम प्रधानों को विशेषाधिकार दिए हैं। इससे आने वाले समय में गांवों में विकास की गंगा बहेगी। मनरेगा योजना के तहत अब ग्राम सभाओं को भी खर्च का ब्योरा आनलाइन दर्ज करना होगा। न्याय पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की मानीटरिंग के लिए निरीक्षकों की नियुक्त भी की जाएगी।
चौदहवें वित्त आयोग और राज्य वित्त आयोग सहित मनरेगा व बीएसएचजी फंड से अब ग्राम सभाएं प्रतिवर्ष २०.८३ लाख रु. से विविध विकास कार्य करवा सकेंगे। खंड विकास अधिकारी सच्चिदानंद प्रसाद ने बताया कि नए नियमों के तहत अब कई वित्तीय अधिकार सीधे ग्राम प्रधान और एडीओ पंचायत को दे दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि कई ग्राम सभाएं पूरे पांच सालों में भी निर्धारित धनराशि का आधा भी नहीं खर्च कर पातीं। इसलिए अब राजवित्त आयोग की ओर से समय-समय पर न्याय पंचायत स्तर पर ग्राम प्रधानों की विशेष बैठक का आयोजन करेगा और विकास एजेंडा एजेंडा तैयार करवाएगा। इसके साथ ही न्याय पंचायत स्तर के सभी पंचायत घरों को प्रत्येक दशा में कंप्यूटरीकृत किया जाएगा। साथ ही विकास की धनराशि का इस्तेमाल भली प्रकार हो इसकी मानीटरिंग के लिए ब्लाक स्तर पर निर्माण विभाग के दो जेई सहित आयोग की ओर से एक लिपिक और कंप्यूटर आपरेटर तैनात किए जाएंगे। १४ वें राजवित्त और राजवित्त आयोग का सारा पैसा ई-पेंमेंट के माध्यम से ही खर्च किया जाएगा। इसलिए सभी ग्राम प्रधानों को सर्विस टैक्स सहित विविध प्रकार के टैक्स देना भी अनिवार्य होगा। नए नियमों के तहत सभी ग्राम सभाओं को वाणिज्यकर विभाग से टिन नंबर लेना अब अनिवार्य किया गया है। एपीओ राहुल कटियार ने बताया कि ग्राम पंचायत के द्वारा कराए गए विकास कार्यों की प्रतिमाह प्रगति रिपोर्ट आयोग को भेजी जाएगी। इसके साथ ही एडीओ पंचायत का कार्यालय भी विकास खंड कार्यालय की तरह विकसित किया जाएगा उन्हें क्षेत्रीय निरीक्षण के लिए अलग से मार्ग व्यय व भत्ते दिए जाएंगे।
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मद का नाम प्रति ग्रामसभा वार्षिक धन आवंटन प्रति ग्रामसभा ५ वर्ष में धन आवंटन
१४ वां वित्त आयोग ६.५४ लाख रु. ३२.७० लाख रु.
राजवित्त आयोग ४.१९ लाख रु. २०.९५ लाख रु.
बीएचएसजी ०.१० लाख रु. ०.५० लाख रु.
मनरेगा १० लाख रु. ५० लाख रु.
कुल धनराशि २०.८३ लाख रु. १०३.९० लाख रु
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हाईटेंक व्यवस्था से लैंस होगी ग्रामसभाएं
बिल्हौर। पंचायत राज एक्ट में हुए बदलावों के बाद अब ग्राम सभाओं का कंप्यूटरीकरण होना तय है। गांव में छोटे से छोटे कार्य के लिए मनरेगा योजना के तहत प्रस्ताव की एडवाइस वेबसाइट पर डालना अनिवार्य होगा, तभी धन की निकासी हो सकेगी। इसके साथ ही प्रतिमाह वाणिज्यकर विभाग में भी खर्च का ब्योरा और कर की बैलेंस बनानी होगी। नए प्रावधानों के तहत ग्राम प्रधान गांव के लिए सभी प्रकार की विकास योजनाएं खुली बैठक में ही तैयारकर सकेंगे। इसमें सड़क, खडंजा, स्वच्छता, पेयजल, जल निकासी, सामुदायिक शौचालय, रात्रि प्रकाश, बारात शाला, शिक्षण, ग्राम सभा की आय बढ़ाने की व्यवस्था आदि मुख्य होंगी।
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खुली बैठक की कार्ययोजना पर ही काम
बिल्हौर। विकास खंड अधिकारी ने बताया कि अब जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत के सापेक्ष ग्राम पंचायत ही गांव में विकास की कुंजी होगी। ग्राम प्रधान खुली बैठकर ग्राम पंचायत सदस्यों, बीडीसी सदस्यों और क्षेत्रीय जिलापंचायत सदस्य की देखरेख में गांव में विकास कार्यों की योजना तैयारकर एडीओ पंचायत को देगे। जो क्रमश बीडीओ और सीडीओ तक पहुंचेगी। आयोग ने ग्राम पंचायत सदस्यों को गांव के विकास में भागीदार बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं।
बिल्हौर ब्लाक के गंगा कटरी गांव
आंकिन, अरौल, गिलवट अमीनावाद, हासिमपुर, बहरामपुर, संजती बादशाहपुर, ददिखा, नानामऊ, हसौली काजीगंज, सभियापुर, बोहनार, नानामऊ, महिगवां, गौरी, मोहद्दीनपुर, अकबरपुर सेंग, गदनपुर आहार, मतलबपुर जुलाहा, राधन, सिहुरामऊ
मोटी पगार वाले सफाईकर्मियों की बल्ले-बल्ले
बिल्हौर। तहसील क्षेत्र के चार विकास खंडों में कुल २३६ सफाईकर्मियों की नियुक्ति प्रदेश सरकार के द्वारा साफ-सफाई के लिए की गई है, लेकिन बिल्हौर ब्लाक के ८८, ककवन के ३२, चौबेपुर के १२८ और शिवराजपुर के ९० सफाईकर्मी प्रतिमाह करीबन २० हजार रुपये पगार लेकर भी नियमित काम के लिए अपने कार्यक्षेत्र नहीं पहुंच रहे हैं।
न होने से खराब होता प्रयोगशाला का सामान
कैसे हों किसान खुशहाल, जब कृषि कार्यालय खस्ताहाल
- उप संभागीय कार्यालय दुर्दशा के कारण हुआ जर्जर
- लाखों की लैब में नहीं हो रही मिट्टी की जांच
- कार्यालय में अधिकारी-कर्मी की तैनात तक नहीं
राहुल त्रिपाठी
बिल्हौर। तहसील क्षेत्र में गिरती खेतों की उर्वरता को देखने हुए शासन स्तर से उप संभागीय कृषि प्रसार कार्यालय में अत्याधुनिक प्रयोगशाला की स्थापना कराई गई है, लेकिन विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के कारण लाखों रुपये से तैयार लैब का कोई लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है। हजारों किसानों तक योजनाएं पहुंचाने वाला तहसील स्तरीय यह कार्यालय पूरी तरह दुर्दशा का शिकार है। स्टाफ की कमी के कारण यहां आने वाले किसानों बिना किसी जानकारी के बैरंग ही लौटना पड़ रहा हैं।
प्राकृतिक मार से परेशान किसानों को सहूलियत देने के लिए सरकार की ओर से तहसील मुख्यालय में उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी कार्यालय स्थापना कराई गई है। इसी कार्यालय से चौबेपुर, शिवराजपुर, ककवन और बिल्हौर विकास खंड के कृषि क्षेत्र की उर्वरता, कृषि सयंत्र प्रबंधन, बीज वितरण, कीटनाशक वितरण सहित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना, खाद वितरण, केसीसी आदि योजनाओं को संचालित किया जाता है, लेकिन जिला कृषि अधिकारी की अनदेखी के कारण कार्यालय परिसर बुरी तरह दुर्दशा का शिकार है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार भवन अनदेखी के कारण दिनों-दिन जर्जर होता जा रहा है। शाम ढलते ही अराजक तत्व भी परिसर में सक्रिय हो जाते हैं। वहीं वर्षों से उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी का पद रिक्त होने के कारण विभाग के विषय वस्तु विशेषज्ञ ही कार्यालय को संचालित कर रहे हैं। इससे विभाग की कई योजनाओं की जानकारी किसानों तक नहीं पहुंच पा रही है। किसानों के खेतों की उर्वरता बढ़ाने के लिए कार्यालय में लाखों रुपये खर्च का प्रयोगशाला का निर्माण भी कराया गया, लेकिन अनदेखी के कारण और प्रयोगशाला सहायक की नियुक्ति न होने से लैब उपकरण धूल खा रहे हैं। कार्यालय में तैनात प्रभारी विषय वस्तु विशेषज्ञ रामपाल ने बताया कि लैब में सिर्फ नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जांच के लिए ही सयंत्र लगे हैं, लेकिन कोई लैब सहायक की तैनाती न होने के लंबे समय से किसी भी किसान को मृदा स्वास्थ्य परीक्षण का लाभ नहीं मिला है। किसान कानपुर स्थित मुख्यालय में जाकर इसका लाभ ले सकते हैं। कार्यालय से सिर्फ बीजों का वितरण ही मुख्य रूप से किया जाता है। शेष सभी कार्य कानपुर कार्यालय से ही संचालित होते हैं।
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जिम्मेदार बोले
विभाग में कर्मियों-अधिकारियों की कमी है, जिसकी पूर्ति के लिए शासन स्तर पर कई पर पहल भी की जा चुकी है, बिल्हौर में किसानों की सुविधा के लिए सभी योजनाएं संचालित हैं, जहां तक कार्यालय भवन की दुर्दशा की बात है तो वल्र्ड बैंक से कई बार मद के लिए फरियाद लगाई गई, लेकिन अभी तक धन नहीं मिला है जैसे ही धन आवंटित होता है कार्यालय का रंगरोगन करा दिया जाएगा।
वीके सिंह, उप निदेशक कृषि प्रसार, कानपुर नगर
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तहसील के किसानों संग सरकार लगातार छल कर रही है, ओलावृष्टि का मुआवजा हो या फिर कृषि विभाग की योजनाएं इनका कोई लाभ क्षेत्रीय किसानों को नहीं मिल पा रहा है। उप संभागीय कार्यालय में अधिकारियों की तैनाती न होने से क्षेत्र के किसान पारंपरिक खेती करने को मजबूर हैं। जल्द ही किसान कलेक्ट्रेट में पंचायत कर उप संभागीय कार्यालय के लिए अपनी आवाज बुलंद करेंगे।
विकास तिवारी, भाकियू, कानपुर मंडल अध्यक्ष
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इंसेट-१
बिन कंप्यूटर विभाग कैसे हो हाईटेक
बिल्हौर। कृषि विभाग ने सभी योजनाओं में पारदर्शिता लाने के लिए आनलाइन पंजीयन, बिक्री और अनुदान की व्यवस्था की है, लेकिन तहसील स्तरीय उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी कार्यालय में आज तक कंप्यूटर ही नहीं लग सका है। कार्यालय में कंप्यूटर न होने के कारण आने वाले किसानों को इंटरनेट कैफे जाकर पंजीयन कराकर धन खर्चा करना पड़ता है। मजे की बात यह है कि विद्युत विभाग ने कार्यालय में १० किलोवाट का कनेक्शन दे रखा है, लेकिन दुर्दशा के कारण कार्यालय परिसर में एक बल्ब तक नहीं जलता। -------------
इंसेट-२
अभी तक खातें में नहीं पहुंचा अनुदान
बिल्हौर। कृषि विभाग के द्वारा गेंहू बीज के वितरण के दौरान सभी किसानों के आनलाइन पंजीयन कराए थे और सभी से सीबीएस बैंक खाते का नंबर लेकर अनुदान का पैसा खाते में आने की बात कही थी, लेकिन करीब छह माह गुजर जाने के बाद भी अभी तक अधिकांश किसानों के बैंकों में अनुदान की राशि नहीं आई है। इससे रोजाना बड़ी संख्या में किसान कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। उधर कृषि अधिकारियों का कहना है कि अनुदान का पैसा दो सप्ताह के अंदर ही किसानों के खाते में पहुंच जाएगा।
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