सैबसू का स्वतंत्रता संग्राम .
बिल्हौर गंगा तट के पास बसे सैबसू गांव के वीरों ने देश की आजादी में महत्वपूर्ण निभाई और फिरंगियों को खूब छकाया। अंग्रेजों ने सेनानियों को फांसी, उम्र कैद, जेल, कोड़ों और गांव-घर से बेदखल किया गया। गांव के लोग एकजुट न हो सके, इसके लिए फिरंगियों ने सैबसू गांव के मंदिरों, कुओं पर सिपाहियों की तैनाती कर दी थी। बड़ी संख्या में आजादी की लड़ाई लड़ने वाले सैबसू वासी जेल गए थे। राजनीति शास्त्र के शिक्षक सैबसू गांव के सुरेश चंद्र तिवारी ने बताया कि क्षेत्र में उनके यहां सर्वाधिक शिव मंदिर और कुएं हैं, इन्हीं मंदिरों में भगवान भोले नाथ की पूजा अर्चना के साथ देश को आजादी दिलाने के लिए नीति-रणनीति बनाई जाती थी। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे देवीप्रसाद पांडे, देवी प्रसाद शुक्ला, देवी प्रसाद तिवारी एक ही नाम के होने से अंग्रेजों की बघ्घी जीटी रोड से गांव तक पहुंचने ही नहीं देते थे अटक नरवा में खादी खोदकर रास्ता अवरुद्घ कर दिया जाता था। इसी तरह जगतनरायण तिवारी, गोवर्धन लाल शुक्ला, बद्रीप्रसाद गुजराती, नंद्रकिशोर मिश्रा, बृजकिशोर मिश्र, इनकी पत्नी बृजरानी मिश्र, हरि प्रसाद मिश्र, शशिभूषण बाजपेई उर्फ गुल...